खराब लिफ्ट के बाहर खड़े दोनों मैकेनिक व स्थानीय युवक
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इस फर्म की ही लिफ्ट की देखरेख व मरम्मत की जिम्मेदारी है। पिछले कुछ दिनों से लिफ्ट में खराबी की लगातार शिकायत मिल रही थी।
एक सप्ताह पूर्व भी लिफ्ट में बच्चे फंस गए थे। लिफ्ट में लगातार दिक्कत पर सोसाइटी के लोगों ने जीडीए के अधिकारियों से शिकायत की। बावजूद इसके कोई मैकेनिक ठीक नहीं करने पहुंचा। परिणाम स्वरूप सोमवार को स्कूल से फ्लैट जा रहे तीन बच्चे लिफ्ट में फंस गए। करीब 20 मिनट बाद गार्ड ने चाबी की मदद से उन्हें बाहर निकाला।
मंगलवार को आनन-फानन में लखनऊ से फर्म के दो मैकेनिक लिफ्ट ठीक करने पहुंचे। लिफ्ट की तकनीकी खामी दूर कर वे जाने लगे तो इसकी जानकारी अपार्टमेंट के लोगों को हुई। वे मैकेनिक को रोक कर लिफ्ट बदलने की मांग करने लगे। बाद में उसका बैग रख लिया।
जीडीए के अधिशासी अभियंता ने जानी दिक्कत
लेक व्यू अपार्टमेंट में लिफ्ट में बच्चों के फंसने के मामले की जानकारी होने पर मंगलवार की दोपहर में जीडीए के अधिशासी अभियंता विद्युत सतीश कुमार तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मैकेनिक से लिफ्ट में आई दिक्कत की जानकारी ली। इसके बाद मैकेनिक को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। देर शाम तक मैकेनिक लिफ्ट को दुरूस्त करने में लगा रहा।
अपार्टमेंट के हैंडओवर के बाद हटा दिया गया लिफ्टमैन
लेक व्यू अपार्टमेंट का जीडीए ने जबतक सोसाइटी को हैंडओवर नहीं किया था तब तक लिफ्टमैन तैनात था। लिफ्ट को ठीक करने आए मैकेनिक मोहम्मद शमीम ने बताया कि अपार्टमेंट के हैंडओवर के बाद सोसाइटी ने लोगों को हटा दिया। लिफ्ट की देखरेख के लिए फर्म की तरफ से यहां एक कर्मचारी पीयूष की तैनाती की गई है, जो समय-समय पर आकर देखरेख करता रहता है।
लिफ्ट संचालन के मानक में है लिफ्ट मैन की तैनाती
गोरखपुर में बढ़ती बहुमंजिली इमारतों के चलते लिफ्ट की संख्या भी बढ़ती जा रही है। होटल, अस्पताल समेत हाईराइज बिल्डिंग में लिफ्ट लगाई जा रही है, लेकिन बहुत ही कम जगहों पर लिफ्ट संचालन के लिए लिफ्टमैन की तैनाती की गई है।
इसके चलते लोग स्वत: लिफ्ट का संचालन कर रहे हैं। ऐसे में लिफ्ट फंसने पर उनकी जान पर बन आ रही है। जीडीए के अधिशासी अभियंता सतीश कुमार तिवारी ने बताया कि लिफ्ट संचालन के मानक में लिफ्ट मैन की तैनाती शामिल है।
तैनात लिफ्ट मैन विपरीत परिस्थिति में फंसने पर लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। लिफ्ट निरीक्षक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से इलेक्ट्रिकल या यांत्रिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री धारक होना अनिवार्य है।
लेक व्यू अपार्टमेंट, जिसमें खराब हुई थी लिफ्ट।
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जीडीए टॉवर में लगे लिफ्ट के सेंसर पर चिपका दिया च्यूइंगम
गोलघर में जीडीए टॉवर में भी लिफ्ट लगी है लेकिन यहां पर भी लिफ्टमैन तैनात नहीं है। लोग स्वत: लिफ्ट का संचालन करते हैं। कुछ दिन पहले अराजक तत्वों ने लिफ्ट के सेंसर पर च्यूइंगम चिपका दिया, जिसके चलते सेंसर काम करना धीरे-धीरे बंद कर दिया। परिणामस्वरूप अच्छी तरह से बिना दरवाजा बंद हुए लिफ्ट चलती है। बाद में लिफ्ट खराब होने पर जब मैकेनिक पहुंचे तो सेंसर पर च्यूइंगम चिपकाने की जानकारी हुई।
गोरखपुर में लिफ्ट में फंसी प्रमुख घटनाएं
18 मई 2024 : गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छह की लिफ्ट में छह यात्री करीब 13 मिनट फंसे रहे। दरवाजा बंद होते ही लिफ्ट रुक गई। जानकारी होने पर पहुंची रेलवे की तकनीकी टीम ने दरवाजा खोला।
13 जून 2024 : नगर निगम में काम से गई दो महिलाएं लिफ्ट में फंस गईं। जानकारी होने पर नगर निगम की तकनीकी टीम ने काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खोलकर उन्हें बाहर निकाला। इसे लेकर नगर निगम ने कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को पत्र लिखा है।
21 फरवरी 2020 : गोरखपुर रेलवे स्टेशन के कैब-वे के पास लगी लिफ्ट में तकनीकी खराबी आने से एक बच्चा व बुजुर्ग महिला करीब एक घंटे तक फंस गईं। किसी प्रकार लिफ्ट को नीचे लाकर लॉक तोड़कर बाहर निकाला गया।
1 अक्टूबर 2022 : एम्स की लिफ्ट फंसने से मरीज व तीमारदार काफी देर तक परेशान रहे। इमरजेंसी हूटर सुनने के बाद चाबी लेकर पहुंचे गार्ड ने लिफ्ट खोलकर लोगों को बाहर निकाला। चाबी खोजने में ही 15-20 मिनट का समय लग गया।
30 अगस्त 2022 : महिला अस्पताल की लिफ्ट में रात में भर्ती मरीज को देखकर जा रहे तीन तीमारदार फंस गए। काफी मशक्कत के आधे घंटे बाद वह बाहर निकल सके। लिफ्ट से बाहर आने के बाद उन्होंने हंगामा किया था।
23 अप्रैल 2021 : बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित तीन शवों को साथ लेकर जा रहे कर्मचारी फंस गए। बाद में कर्मचारियों ने फोन कर इसकी जानकारी अन्य कर्मचारियों को दी। इसके बाद लिफ्ट को तोड़कर उनको सुरक्षित बाहर निकाला गया।