लॉकडाउन की वजह से मार्च से विद्यालय बंद चल रहे हैं। ऐसे में बच्चों को कुपोषण का शिकार होने से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने अनूठी पहल करते हुए पहले चरण में 24 मार्च से लेकर 30 जून यानी 76 दिन के एमडीएम का खाद्यान्न और परिवर्तन लागत को बच्चों को मुहैया कराने का फैसला लिया था। जिले में खाद्यान्न वितरण का काम प्रधानाध्यापकों ने कोटेदारों के साथ मिलकर पूरा कर लिया है। वहीं परिवर्तन लागत के रूप में धनराशि अभिभावकों के खातों में प्रेषित की जा रही है।
बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि शासन ने जुलाई और अगस्त में भी मिड डे मील के खाद्यान्न और परिवर्तन लागत को बच्चों को मुहैया कराने का फैसला लिया है। प्राथमिकता के आधार पर पहले 76 दिन की धनराशि को खातों में प्रेषित किया जाएगा। उसके बाद ही दूसरे चरण के 49 दिनों के खाद्यान्न वितरण और परिवर्तन लागत के हस्तांतरण पर फोकस किया जाएगा।