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गोरखपुर: एमबीबीएस छात्रों ने ‘हिप्पोक्रेटिक’ शपथ लेकर शुरू की पढ़ाई, जानिए क्या है वजह

Tue, 15 Feb 2022 10:26 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

एमबीबीएस के नवागत छात्रों को पहले दिन कॉलेज प्राचार्य ने शपथ दिलाई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कैंपस भ्रमण कराया।
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BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के नए बैच के विद्यार्थियों को पहले दिन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने हिप्पोक्रेटिक शपथ दिलाई। साथ ही विद्यार्थियों को विभागों के बारे में जानकारी देते हुए चिकित्सीय कार्यप्रणाली के बारे में बताया। पहले दिन एमबीबीएस के 37 विद्यार्थी मौजूद रहे। इस बीच छात्रों ने अपना-अपना परिचय भी दिया।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 150 सीटें हैं। इन सीटों पर काउंसिलिंग हो चुकी है। प्रवेश प्रक्रिया के बाद पहली बार ये विद्यार्थी बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। विद्यार्थियों ने शिक्षकों को अपना परिचय दिया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को कैंपस में घुमाते हुए विभागों की जानकारी दी। प्राचार्य ने बताया कि नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की पहल पर दो साल पहले एमबीबीएस की पढ़ाई के पैटर्न में बड़ा बदलाव हुआ है।

इसके तहत एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में फाउंडेशन कोर्स शामिल किए गए हैं। इसे 2019-20 सत्र से लागू भी कर दिया गया है।  पहले वर्ष से ही विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज के वार्ड, पैथोलॉजी लैब, रेडियो डायग्नोसिस सेंटर समेत अन्य विभागों में नियमित भ्रमण कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को मरीजों की जांच, इलाज और परीक्षण की जानकारी मिल सकेगी।
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फाउंडेशन कोर्स में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य

एमबीबीएस की पढ़ाई में फाउंडेशन कोर्स का महत्व काफी बढ़ गया है। इसके तहत सभी विद्यार्थियों की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इस कोर्स में विद्यार्थियों को कई प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी। संगीत, योग, ध्यान और खेलकूद की कक्षाएं भी चलाई जाएंगी। डॉक्टर नए विद्यार्थियों को मरीजों से अच्छा व्यवहार करने के बारे में बताएंगे। इसके लिए विशेष ट्रेनर बुलाए जाएंगे। दूसरे प्रदेशों से आए विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा सिखाई जाएगी, ताकि वे मरीजों और तीमारदारों से अच्छा संवाद कर सकें।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि फाउंडेशन कोर्स का असर विद्यार्थियों पर सकारात्मक पढ़ रहा है।  इससे डॉक्टर और मरीज के बीच संबंध बेहतर होंगे। मरीजों को इलाज में आसानी होगी। विद्यार्थी भी मानसिक रूप से मजबूत होंगे। पहले दिन विद्यार्थियों को इस कोर्स के बारे में भी बताया गया है।  

क्या है हिप्पोक्रेटिक शपथ

हिप्पोक्रेटिक शपथ चिकित्सकों द्वारा ऐतिहासिक रूप से ली जाने वाली नैतिकता की शपथ होती है। यह यूनानी चिकित्सा ग्रंथों में सबसे व्यापक रूप से मानी जाने वाली शपथ है। यह शपथ लेने के बाद डॉक्टर अपनी क्षमता के अनुसार मरीजों की देखभाल और उनका इलाज करते हैं। यूनानी डॉक्टर हिप्पोक्रेट के नाम पर ही इस शपथ का नाम हिप्पोक्रेटिक पड़ा।


 
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