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मौनी अमावस्या आज, बन रहा है महाऔदायिक योग, कैसा रहेगा मुहूर्त, कैसे करें पूजन?

Thu, 23 Jan 2020 10:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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सरयू में डूबकी लगाते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
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माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (मौनी अमावस्या) आज परंपरागत रूप से आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालु इस दिन राप्ती सहित आसपास के नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे। जानकारों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर इसबार आनंद नामक महा औदायिक योग बन रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए मंगलकारी होगा।
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पूरे दिन रहेगा मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, गुरुवार को सूर्योदय 6.38 बजे होगा। अमावस्या तिथि रात्रि 1.41 बजे शुरू हो रही है, जो अगले दिन रात्रि 2.02 बजे तक रहेगी। अर्थात पूरे दिन मौनी स्नान का मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि पवित्र नदियों में स्नान का यह सबसे बड़ा पर्व है। जब चंद्रमा और सूर्य एक साथ आ जाते हैं, तब अमावस्या होती है।

आकाश मंडल में चंद्रमा सूर्य से नीचे अवस्थित है, अमावस्या के दिन इसका श्वेत भाग सूर्य की ओर रहता है, इसलिए इस पर्व पर किए गए दान को सूर्य की किरणें वाष्पीभूत कर चंद्रमंडल तक पहुंचाती हैं, जहां पितरों का निवास माना जाता है। इसी कारण अमावस्या तिथि को स्नान-दान बहुत पुण्यप्रद माना गया है।
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ऐसे करें पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन संगम या पवित्र नदी में स्नान करें। स्नान के बाद मौन व्रत संकल्प लें। भगवान विष्णु की प्रतिमा का पीले फूल, केसर, चंदन, घी के दीपक और प्रसाद के साथ पूजन करें। भगवान का ध्यान करने के बाद विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्त्र नाम का जप करें।

भगवान विष्णु के भक्तों एवं ब्राह्मणों को दान अवश्य करें। गुड़, तिल के लड्डू, कंबल, चावल, खिचड़ी, सतंजा, गाय, ऊनी वस्त्र आदि के दान का विशेष महत्व है। मंदिर या नदी तट पर दीपदान करना न भूलें। सायंकाल भी धूप से आरती करें। पीले मीठे पकवान का भोग लगाएं। गौ को खिलाने के बाद ही व्रत खोलें।

पितृकर्म और देवकर्म का है दिन
पंडित मनीष मोहन के अनुसार, धर्मशास्त्र में अमावस्या को पितृकर्म और देवकर्म दोनों के लिए प्रशस्त दिन माना गया है। इस महिने में सूर्य मकर राशिगत होने से (उत्तरायण का प्रारम्भिक होने के कारण) देवगणों के लिए यह अत्यंत हर्ष का समय रहता है, इसलिए देवी-देवता और सभी तीर्थों के अधिपति पृथ्वी पर आ जाते हैं। ये नदियों के संगम पर स्नान करते हैं। अत: संगम पर स्नान से इनका सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, इस दिन प्रयाग या नदियों के संगम पर अथवा पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति की सात पीढ़ियां पवित्र हो जाती हैं।
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