शहर के अवैध निर्माण के खेल में मास्टर प्लान फेल
28 अगस्त को डीएम कसेंगे पेंच, अवैध निर्माण की होगी समीक्षा, अफसर परेशान
देवरिया। मोहल्लों एवं शहर में अवैध निर्माण की खेल में मास्टर प्लान पूरी तरह फेल हो गया है। डीएम विकसित शहर की अवधारणा तैयार कराने में जुटे तो हैं, लेकिन अवैध निर्माण की वजह से उनकी मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। शहर में अभियान चलाकर अवैध निर्माण चिह्नित किया जाए तो तकरीबन सात हजार से अवैध निर्माण सामने आ सकता है। इसमें मैरेज हाल, होटल, नर्सिंग होम एवं मोहल्लों में आवास, दुकान आदि शामिल हैं। डीएम ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मास्टर प्लान की 28 अगस्त को एक बैठक बुलाई है। इसकी भनक मिलने के बाद विनियमित क्षेत्र से जुड़े अफसरों की परेशानी बढ़ गई है। कारण पास हो रहे नक्शा के मानक की जांच हुई तो पोल खुल सकती है।
तकरीबन डेढ़ लाख आबादी वाले शहर में 25 वार्ड हैं। इसमें तकरीबन 50 के करीब मोहल्ले एवं छोटी-छोटी कॉलोनियां शामिल हैं। देखा जाए तो भुजौली कॉलोनी, महाराणा प्रताप नगर, बुद्ध विहार कॉलोनी और न्यू कॉलोनी को छोड़कर कोई भी मोहल्ला एवं कॉलोनी प्लानिंग के तहत नहीं बसाई गई है। किसी भी मोहल्ले में पार्क, मकान के आगे चार फीट खाली स्थान, सीवर की सुविधा, पेड़, पौधे नहीं हैं। मोहल्ले एवं कॉलोनियों में तकरीबन 50 प्रतिशत अवैध निर्माण हैं। ताबड़तोड़ तरीके से हुए अवैध निर्माण का खेल रोकने में शहर का मास्टर प्लान पूरी तरह से फेल साबित हो रहा है। मिलीभगत ने अवैध निर्माण ने शहर की अवधारणा बिगाड़ कर रख दिया है। कहने को तकरीबन एक हजार लोगों को नोटिस अवैध निर्माण कराए जाने का दिया गया है। लेकिन कई सालों से फाइलों पर धूल जमी हैं। बीस से अधिक एसडीएम/ प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र आए और गए, सबने अपने-अपने मतलब की पत्रावलियों पर बहस सुनी और निस्तारण कर चलते बने। यही कारण है कि 800 केस अब भी लंबित हैं। इसकी पत्रावलियां देखने की किसी को फुर्सत नहीं है। सभी केस अवैध निर्माण से संबंधित हैं। कुछ नोटिस तो ऊपर ही ऊपर मास्टर प्लान के जिम्मेदार निस्तारित कर देते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिन मामले में सेटिंग नहीं होती सिर्फ उन्हीं मामलों में कार्रवाई की जाती है। दो एक मामलों को छोड़ दिया जाए तो मास्टर प्लान ने कोई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की। नगरपालिका के अधिकारी भुजौली कॉलोनी सहित कई अवैध निर्माण की सूचना मास्टर प्लान को लिखित दिए लेकिन सभी मामलों में सेटिंग कर मामले का दबा दिया गया।
अनियोजित विकास के साथ ही सेटिंग भी होती रही
देवरिया। शहर में तकरीबन 21 हजार मकान हैं। इसमें आधे से अधिक लोगों ने नक्शा पास नहीं कराया है। शहर एवं मोहल्लों के विकास की सूरत पर गौर किया जाए तो मास्टर प्लान की मिलीभगत से विगत दस सालों से अनियोजित विकास होता रहा, शहर का स्वरूप चौपट होता रहा और मास्टर प्लान नोटिस देकर दबाव बनाकर वसूली की खेल में जुटा रहा। अवैध निर्माण रोकने में मास्टर प्लान ने कोई रुचि नहीं ली। नक्शा कहीं 12 फीट, कहीं 16 फीट तो कहीं 20 फीट की सड़क दिखाकर लोग पास कराने में जुटे रहे। नियम है कि नक्शा पास कराने के बाद चार फीट जमीन आगे छोड़ी जाए लेकिन लोगों ने जमीन छोड़ना तो दूर सड़क पर ही अपनी-अपनी सीढ़ी बनाकर सड़क को और संकरा बना दिया। उमानगर, रामगुलाम टोला, सिंधी मिल, देवरिया रामनाथ, साकेतनगर, भटवलिया, रामनाथ देवरिया दक्षिणी, देवरही टोला सहित 30 से अधिक मोहल्ले एवं कॉलोनियां हैं जहां आमने-सामने दो गाड़ियां फर्राटा भरते हुए पास नहीं हो सकतीं।
इनसेट
यह है विनियमित क्षेत्र का दायरा
वर्तमान समय में मास्टर प्लान का नियम नगर पालिका समेत 73 राजस्व गांवों में लागू है। 1980 में जब मास्टर प्लान लागू हुआ उस दौरान विनियमित क्षेत्र में नगर पालिका अलावा 68 राजस्व गांव शामिल किए गए थे। बाद में सझवां, गुड़री, टड़वा, सोपरी आदि पांच गांवों को विनियमित क्षेत्र में जोड़ा गया।
कोट:
शहर का अनियोजित विकास हुआ है। अतिक्रमण कर कुछ लोगों ने शहर का स्वरूप बिगाड़ दिया है। प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र बोर्ड की बैठक 28 मार्च को बारह बजे से होगी। इसमें अपीलों की सुनवाई के साथ अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान संचालित करने का निर्णय लिया जाएगा।
-अमित किशोर, डीएम
दो माह के अंदर शासन को भेजी जाएगी सर्वेक्षण रिपोर्ट
अमृत योजना के तहत महायोजना 2031 का सर्वेक्षण शुरू
कंसल्टेंट संस्था को मिली है भौतिक सर्वेक्षण की जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। बसावट के लिहाज से अव्यवस्थित हो चुके शहर को संवारने की कवायद शुरू हो चुकी है। पुराने मास्टर प्लान की जगह, महायोजना 2031 के नक्शे कदम पर शहर के विकास का रोडमैप तैयार करने की कवायद शुरू होगी। इससे कॉलोनियों की बेतरतीब बसावट से निजात तो मिलेगी ही उद्योग और व्यवसाय को भी सुव्यवस्थित माहौल मिलेगा। सहयुक्त नियोजक गोरखपुर के निर्देश के क्रम में अमृत योजना के तहत महायोजना 2031 के लिए सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। नामित संस्था कंसल्टेंट दो माह में रिपोर्ट नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र को सौंपेगी। शासन से मंजूरी मिलने के बाद शहर में महायोजना 2031 लागू होगी।
देवरिया विनियमित क्षेत्र का मास्टर प्लान 1980 के दशक में लागू हुआ। जो अब सिर्फ नाम का रह गया है। ज्यादातर निर्माण कार्य नक्शे को दरकिनार करके हुए हैं। गली-मोहल्ले तो दूर मुख्य मार्गों की वास्तविकता नक्शे के अनुरूप धरातल पर मेल नहीं खा रही। अतिक्रमण के चलते शहर के तमाम सड़कों की चौड़ाई आधे से भी कम हो गई है। कई सड़कों के किनारे नाली निर्माण तक को जगह नहीं है। मोहल्लेवासी बरसात भर जलभराव की समस्या से परेशान रहते हैं। मास्टर प्लान की अनदेखी का व्यापक असर उद्योग और व्यवसाय पर भी पड़ा है। नक्शे में जो एरिया उद्योग के लिए दर्शाए गए थे, वहां आवासीय कॉलोनियां बस गई हैं। अलग-अलग इलाकों में उद्योग लगाने पर उद्यमियों को एनओसी लेने में परेशानी होती है।
इस संबंध में जेई मास्टर प्लान राकेश कुमार का कहना है कि अमृत योजना के तहत महायोजना 2031 के लिए सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। नामित संस्था कंसल्टेंट दो माह में रिपोर्ट नियंत्रक प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र को सौंपेगी। शासन से मंजूरी मिलने के बाद शहर में महायोजना 2031 लागू होगी।