जीडीए के जानकारों का कहना है कि करीब 2500 एकड़ क्षेत्रफल विनियमित घोषित किया गया है। इसमें कुल 153 कॉलोनियां शामिल हैं। मानचित्र स्वीकृत न होने से विनियमित क्षेत्र में हुए निर्माण अनियमित निर्माण की श्रेणी में आते हैं, जिनको अवैध घोषित कर दिया गया है। महायोजना-2031 के लागू होने के बाद से जीडीए पर लगा अनियमित निर्माण का दाग मिट जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नई महायोजना-2031 के संशोधित प्रारूप में हाईवे फैसिलिटी जोन के प्रस्ताव में बदलाव नहीं किया गया है। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, निर्मित, निर्माणाधीन या प्रस्तावित बाईपास के दोनों ओर 30-30 मीटर हरित क्षेत्र रहेगा।
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नगर क्षेत्र के बाहर दोनों ओर हाइवे फैसिलिटी जोन प्रस्तावित हैं। इसके पीछे आवासीय और अन्य भू उपयोग भी दिए गए हैं। ट्रक अड्डा, ट्रांसपोर्टनगर, बस स्टेशन, कूड़ा निस्तारण स्थल, वेयर हाउस आदि को शहर के बाहर स्थानांतरित करने की संस्तुति की गई है। महायोजना के मुख्य मार्गों के दोनों ओर बाजार, स्ट्रीट की व्यवस्था की गई है। इसी के अनुसार भू उपयोग निर्धारित किया गया है।
शासकीय समिति की बैठक में महायोजना 2031 को स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। यदि इस दौरान किसी तरह के सुधार या अन्य कोई निर्देश मिलते हैं। तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-महेंद्र सिंह तंवर, उपाध्यक्ष, जीडीए।