गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की आठ जनवरी को होने वाली बैठक में कई अहम मसलों पर निर्णय होगा। दो एजेंडे ऐसे हैं जो हजारों लोगों को राहत दे सकते हैं। रामगढ़ताल किनारे के पांच सौ मीटर के दायरे में मानचित्र स्वीकृत करने पर लगी रोक हटाई जा सकती है। अधूरे पड़े निर्माण पूरे कराए जा सकेंगे तो नए निर्माण के लिए मानचित्र भी पास हो सकेगा।
रामगढ़ताल के वेटलैंड का निर्धारण होने के बाद अब वेटलैंड वाले दायरे में मानचित्र नहीं स्वीकृत हो सकेगा। नोटिफिकेशन के मुताबिक 28 में से 22 जगहों पर वेटलैंड का दायरा 50 मीटर है। ऐसे में इस दायरे के बाहर मानचित्र स्वीकृत करने पर निर्णय होने की पूरी उम्मीद है।
बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की हाईपावर कमेटी ने रामगढ़ताल के 500 मीटर दायरे को वेट लैंड बताते हुए वहां सभी तरह के (एनेक्सी और प्राणि उद्यान छोड़कर) निर्माण पर रोक लगाते हुए बन चुके भवनों को ध्वस्त करने की संस्तुति की थी। इसके बाद से ही जीडीए, एनजीटी में इस बात की पैरवी कर रहा है कि भवनों के ध्वस्तीकरण की संस्तुति जनहित में नहीं है। इस दायरे में जीडीए की भी कई योजनाएं पड़ रही थीं।
हालांकि 500 मीटर दायरे में निर्माणों के ध्वस्तीकरण से राहत तो मिल चुकी है लेकिन इन क्षेत्रों में प्राधिकरण नए निर्माण का मानचित्र नहीं पास कर रहा। वहीं, 500 मीटर के ही दायरे में जीडीए की आवासीय योजना लोहिया एन्क्लेव के आने की वजह से वहां के आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा था। नोटिफिकेशन में यह आवासीय योजना, रामगढ़ताल के वेटलैंड में नहीं आ रही है। ऐसे में अब योजना के करीब 450 आवंटियों को कब्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।