कोरोना महामारी किसी की जिंदगी छीन रही तो किसी की नौकरी। रोजमर्रा और फैक्ट्री में काम करने वाले गांव को लौट रहे हैं। मन में उम्मीद यही कि खेती करके गुजर बसर कर लेंगे, पर यह भी आसान थोड़े है। कोई घरवालों को कर्ज देने के बहाने तो कोई दबंगई से जमीन हथिया लेना चाहता है। कोर्ट बंद हैं।
सुनवाई तो सिर्फ प्रशासन और पुलिस के दरबार में ही होनी है तो फरियाद लिए बड़ी उम्मीद से पीड़ित पहुंच रहे हैं। कुछ मामलों में पुलिस मददगार बनी तो काम भी हुआ मगर जहां अफसरों की नजर नहीं पड़ी वहां पर आर्थिक तंगी दूर करना एक बड़ा सवाल बन गया है।
जमीन पर कब्जा और उसके लिए हत्या तक होना जिले में कोई नई बात नहीं है। पर इन दिनों यह समस्या बढ़ी है। कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर कुछ लोग मनमानी कर रहे हैं। शिकायत अफसरों तक पहुंचती है तो फरियाद सुन ली जाती है नहीं तो होता तो वही है जो थाना पुलिस चाहती है।