कोरोना संक्रमण से मरने वाली बुजुर्ग महिला सूरजकुंड में रहती थीं वहीं केजीएमयू (लखनऊ) में दम तोड़ने वाले बुजुर्ग शहर के नरसिंहपुर के काली मंदिर के पीछे रहते थे। दोनों ही मुहल्लों को सील करा दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक सूरजकुंड की रहने वाली 81 वर्षीय महिला को सांस लेने में तकलीफ थी। उन्हें सीने में दर्द की शिकायत होने पर परिजनों ने 16 जून को गोरखनाथ क्षेत्र के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 17 जून को उनका नमूना निजी लैब में जांच के लिए भेजा गया। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। शनिवार को महिला की मौत हो गई। इधर, नरसिंहपुर में काली मंदिर के पीछे रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।
19 जून को इलाज के लिए परिजन लखनऊ ले गए थे जहां उनकी मौत हो गई। इस सूचना पर दोनों मुहल्लों को सील करा दिया गया है। पुलिस ने लोगों को होम क्वारंटीन की सलाह दी है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि निजी अस्पताल को एक दिन के लिए सील कराते हुए 24 घंटे में दो बार सैनिटाइज कराने के निर्देश दिए गए हैं। संपर्क में आने वाले लोगों और उनके परिजनों के नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे।
बांसगांव के डेवढ़ार बाबू की रहने वाली 38 वर्षीय महिला लखनऊ एसपीजीआई में पॉजिटिव पाई गई है। बताया जाता है कि पति भिलाई में काम करता था। जहां उसकी तबीतय खराब हुई तो वह मई में पति को लेकर अपने घर आ गई। इसके बाद करीब 15 दिनों तक उसने बीआरडी में पति का इलाज कराया। ठीक न होने पर वह अपने देवर के साथ पति के इलाज के लिए एसपीजीआई चली गई। जहां पर उसके पति की रिपोर्ट निगेटिव आ गई। महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अब उसके देवर की जांच भी लखनऊ में होगी।
40 कर्मियों को कोरोना का डर
एसआईसी के पॉजिटिव आने की सूचना पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया है। कार्यालय में तैनात 40 से अधिक कर्मचारी डर गए हैं। मेडिकल कालेज में अब तक एसआईसी समेत 11 डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं। डॉक्टरों के छह परिजन भी संक्रमित हुए हैं। इसके अलावा तीन नर्सें और दो नर्सों के परिजन भी पॉजिटिव पाए गए है। ऐसे में अब कोरोना का डर डॉक्टरों और कर्मियों में और बैठ गया है।
रेड जोन पहले ही घोषित हो चुका है कैंपस
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कैंपस को जिला प्रशासन ने पहले ही रेड जोन घोषित कर दिया है। जिस वक्त कैंपस रेड जोन घोषित हुआ था, उस समय बीआरडी के एक भी डॉक्टर और कर्मी संक्रमित नहीं पाए गए थे। रेड जोन घोषित होने के करीब एक महीने बाद डॉक्टरों और कर्मियों में संक्रमण फैलने का सिलसिला शुरू हुआ है।