ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार शनिवार त्रयोदशी तिथि का मान शाम पांच बजकर 43 मिनट तक, पश्चात चतुर्दशी तिथि है। उत्तराषाढ़ नक्षत्र दिन में तीन बजकर 34 मिनट तक पश्चात श्रवण नक्षत्र है। इस दिन व्यतिपात योग शाम पांच बजकर 54 मिनट पश्चात विमान योग और चंद्रमा की स्थिति मकर राशिगत है।
शाम तीन बजकर 34 मिनट से संपूर्ण रात्रि पर्यंत सर्वार्थसिद्धियोग भी है। इस दिन बन रहा व्यतिपात योग और सर्वार्थसिद्ध योग मनोकामनाओं को पूरा करने के साथ ही पूजन का कई गुना फल देने वाला होगा।
व्रत का महात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्द्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। जो व्यक्ति शिवरात्रि को निर्जला व्रत रहकर जागरण और रात्रि के चारों प्रहरों में चार बार पूजा करता है, वह शिव की कृपा को प्राप्त करता है। शिवरात्रि महात्म्य में लिखा है कि शिवरात्रि से बढ़कर कोई दूसरा व्रत नहीं है।
ऐसे करें पूजन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें। व्रत रखकर किसी शिव मंदिर या अपने घर में नर्मदेश्वर की मूर्ति अथवा पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर समस्त पूजन सामग्री एकत्र कर आसन पर विराजमान होकर ‘मम इह जन्मनि जन्मान्तरेवार्जित सकल पाप क्षयार्थं आयु-आरोग्य-ऐश्वर्य-पुत्र-पौत्रादि सकल कामना सिद्धिपूर्वक अन्ते शिवसायुज्य प्राप्तये शिवरात्रिव्रत साड्गता सिध्यर्थं साम्बसदाशिव पूजनम करिष्ये। मंत्र जप करते हुए स्थापित शिवमूर्ति की षोडशोपचार पूजा करें।
आक, कनेर, विल्वपत्र और धतूरा, कटेली आदि अर्पित करें। रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र, शिव संबंधित अन्य धार्मिक कथा सुनें। रुद्रभिषेक करा सकें, तो अत्यंत उत्तम है। रात्रि जागरण कर दूसरे दिन प्रात: काल शिवपूजा के पश्चात जौ, तिल और खीर से ‘त्र्यम्बकं यजामहे’ या ‘ऊं नम: शिवाय’ आदि मंत्रों का जाप कर यज्ञशाला में 108 आहुतियां दें। ब्राह्मणों या शिवभक्तों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें फिर स्वयं भोजन कर व्रत का पारण करें।