महराजगंज में शासन द्वारा 74वें स्वतंत्रता दिवस पर एक नेपाली कैदी की रिहाई में बाधा बनी जुर्माने की धनराशि को लेकर महराजगंज जिला कारागार प्रशासन ने अनूठी मिशाल पेश की है। इस मिसाल ने इंसानियत का न सिर्फ नया नजीर बुना बल्कि भारत नेपाल के मैत्रीय संबंधों को भी रेखांकित कर दिया।
अर्थदंड की राशि जमा करने के लिए जब परिजन व सामाजिक संस्थाओं कदम नहीं बढ़ाया तो जेलर अरविंद श्रीवास्तव की पहल रंग लगाई और डिप्टी जेलर व जेल के कर्मचारियों ने आपस में चंदा जुटा कर न सिर्फ नेपाली कैदी का जुर्माना भरा बल्कि बुधवार की देर शाम उक्त नेपाली कैदी को जेल से रिहा भी करा दिया।
इसे लेकर जिलेभर में जेल प्रशासन की खूब चर्चा हो रही हैं, लोग यह कहते नहीं थक रहें कि इंसानियत अभी भी जिंदा हैं और ऐसे ही भलेमानुस उसे परिभाषित भी कर रहें हैं।
दुष्कर्म के आरोप में 2011 से सजा काट रहा था डाक्टर
शासन के आदेश पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नेपाल के जिस कैदी को बुधवार को महराजगंज जिला जेल से रिहा किया गया, उसका नाम बलिराम यादव उर्फ डाक्टर है। वह नेपाल के रुपनदेही जिले के लुंबिनी का रहने वाला है।