झंगहा निवासी राघवेंद्र यादव, गुलरिहा के राकेश यादव, बेलघाट के शैलेंद्र प्रताप सिंह, बांसगांव निवासी राधे उर्फ राधेश्याम यादव, कैंट निवासी सत्यव्रत राय, खजनी निवासी सुभाष शर्मा, कैंट के अजीत शाही, गीडा के मल्हीपुर निवासी प्रदीप सिंह, शाहपुर के सुधीर सिंह, गोरखनाथ के विनोद उपाध्याय का नाम शामिल किया गया है।
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गोरखपुर जिले के टॉप टेन बदमाशों में से अधिकतर जेल के अंदर हैं या फिर जमानत पर बाहर हैं, लेकिन माफिया विनोद उपाध्याय अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है। जबकि, उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी हो चुका है। अब पुलिस उसके साथ ही उसके शरणदाता तक को चिन्हित करना शुरू कर दी है। क्योंकि, बिना किसी के मदद के माफिया का लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहना संभव नहीं है।
माफिया की आखिरी बार नेपाल में लोकेशन मिली थी, लेकिन इसके बाद से पुलिस के हाथ ऐसा कोई सुराग नहीं लग सका, जिसकी मदद से उसकी गिरफ्तारी हो सके। माफिया विनोद और उसके भाई संजय पर पहले 50-50 हजार रुपये का इनाम हुआ था। इसके बाद ही संजय उपाध्याय कोर्ट में हाजिर हो गया, लेकिन विनोद फरार चल रहा है। इस वजह से उस पर इनाम बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया।
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- दर्ज केस की विवेचना साक्ष्यों के साथ पूरी कर चार्जशीट दाखिल करना होगा
- कोर्ट में केस की तारीख पर पुलिस को साक्ष्य उपलब्ध कराना होगा
- कोर्ट में गवाह को तय समय पर लेकर जाना होगा और गवाही करानी होगी
- कोर्ट में सजा के लिए जिस भी साक्ष्य को मांगे जाने या आपत्ति होने पर उसका निस्तारण करेगी
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि गोरखपुर जिले के टॉप-10 बदमाशों पर दर्ज केस की सूची तैयार कर पुलिस चार्जशीट दाखिल कर रही है। नए केस में साक्ष्यों के साथ ही चार्जशीट दाखिल करने के साथ ही पुलिस को केस में पैरवी के लिए आदेश दिया गया है। इसकी निगरानी एडिशनल एसपी कर रहे हैं। सभी माफिया के लिए अलग-अलग एडिशनल एसपी को नोडल बनाया गया है। ये केसों की निगरानी करेंगे, ताकि इन्हें सजा दिलाई जा सके। इसकी नियमित निगरानी मैं खुद करता हूं।