लखनऊ के निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में 9 मई 2003 को कवयित्री मधुमिता शुक्ला की गोली मारकर हत्या हुई थी। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, मधुमिता पेपर मिल कॉलोनी में अकेली रहती थी। पूरे मामले में सीबीआई जांच के दौरान अमरमणि पर गवाहों को धमकाने के आरोप लगाए गए तो मुकदमा देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया।
देहरादून फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 24 अक्तूबर, 2007 को अमरमणि, मधुमणि, भतीजे रोहित चतुर्वेदी, प्रकाश पांडेय और शूटर संतोष राय को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। फिर जुलाई 2012 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी दोषियों को सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। हालांकि, अमरमणि और उसकी पत्नी मधुमणि करीब 20 साल सजा काटने के बाद 25 अगस्त को शासन के निर्देश पर समय से पहले ही जेल से रिहा कर दिए गए।
अमरमणि, मधुमिता की समय पूर्व रिहाई के बाद अब शूटर संतोष राय ने भी समय से पहले रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है। संतोष ने भी अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी के मामले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि वह सरकार को उसकी रिहाई पर फैसला करने का निर्देश दे। साथ ही यह भी मांग की है कि जब तक उसकी दया याचिका पर फैसला ना हो, तब तक अंतरिम जमानत दी जाए।
हालांकि, अभी संतोष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से पहले यूपी सरकार और उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है। संतोष ने अपने वकील हर्षवर्धन विशेन की ओर से दाखिल याचिका में कहा है कि उसने केंद्र, यूपी और उतराखंड सरकार को समय से पहले रिहाई की अर्जी दाखिल की है और अब तक उस पर फैसला नहीं किया गया है।
उसने बताया है कि वह 27 मार्च 2023 को छूट के साथ 18 साल 1 महीने 14 दिन की कुल अवधि के लिए और छूट के साथ 21 साल 10 महीने 15 दिन की अवधि के लिए जेल में बंद है। याचिकाकर्ता छूट और समय पूर्व रिहाई के लिए विचार किए जाने का पात्र है। अदालत सरकार को मामले पर विचार करने का निर्देश दे।
हर्षवर्धन विशेन ने दलील दी है कि सह-अभियुक्त मधुमणि त्रिपाठी और अमरमणि त्रिपाठी की याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को उनके द्वारा समय पूर्व रिहाई के लिए दायर आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट उसके मामले पर भी तुरंत फैसला करने को कहे, तब तक उसे अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए।