पांच नंबर प्रदेश विधायक कल्पना पांडेय ने कहा कि नेपाल सरकार ने नागरिकता सहित अन्य सरकारी कोटा से मदेशियों को वंचित किया है। सरकार को भारतीय महिला से शादी के मामले में नागरिकता को लेकर छूट देने की जरूरत है। सीमावर्ती नेपाल के तराई क्षेत्र में भारत से लगती 22 जिलों के लगभग एक करोड़ पचास लाख लोग भारत के सीमावर्ती क्षेत्र में शादी विवाह करते हैं। इस कानून से ज्यादातर मधेशियों को परेशानी होगी।
नेपाल में मधेशी समुदाय की आबादी का आधा यानी पचास प्रतिशत मधेशी हैं। फिर भी मधेशी नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। नेपाल में राणा शाशको के बाद पहाड़ी मूल के लोगों की सरकार रही है। जिसमें नेपाल का मधेशी बाहुल्य क्षेत्र तराई इलाका पहाड़ के मुकाबले विकास के नाम पर बहुत ही पिछड़ा और अशिक्षित हैं। लोग तराई क्षेत्र में या तो खेती करते हैं या काम के सीलसीले में घरों से निकल कर भारत या विदेशों का रुख करते हैं।
22 जिलो के मधेशी होंगे प्रभावित
नेपाल के भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के रूपनदेही, नवलपरासी, कपिलवस्तु, दांग, बाके ,बर्दिया, कैलाली, बीरगंज, सर्लाही, सुनसरी, मोरंग समेत 22 जिलों के लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। इसके साथ ही भारत के अलावा अन्य देशों में शादी करने वाले नेपाली नागरिकों को इसी कानून का पालन करना होगा।
तराई के 22 जिलों में रहने वाले मधेशियों की बोली-भाषा, खान-पान, रहन-सहन पहाड़ी नेपालियों से अलग है। नेपाल की सदन में 33 सांसद मधेशी हैं, इसके बाद भी नेपाल के संविधान में मदेशी समुदाय को कोई जगह नहीं मिल पाई। जिसको लेकर चार साल पूर्व करीब छह माह चले मदेशियों के आंदोलन के बाद भी उनकी सुनवाई नही हो सकी।
कम्युनिष्ट पार्टी नेपाल रूपनदेही जिला कमेटी सदस्य और पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि सरकार की परामर्श समिति नागरिकता बिल संसद में पास करने जा रही है। यह कानून सभी विदेशी महिला के साथ है। चाहे वह भारतीय हो या अन्य किसी भी देश की महिला।
नेपाली नागरिक के साथ विवाह करने के बाद उसे सात साल बाद नेपाल की नागरिकता मिलेगी। उनसे होने वाले संतान को भी सरकार ने नागरिकता देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि भारत के साथ हम लोगों का सदियों पुराना रिश्ता है। इस कानून के बनने के बाद भारत और नेपाल का वैवाहिक संबंध प्रभावित होगा।