पूर्वोत्तर रेलवे के गोमतीनगर, मंडुआडीह के बाद औड़िहार में भी ऑटोमेटिक कोच वाशिंग मशीन लगा दी गई है। सोमवार को इस मशीन से ट्रायल के तौर पर दो ट्रेनों के कोचों की सफाई भी की गई। इस मशीन से ट्रेनों की सफाई में समय तो बचेगा ही, पानी की भी बचत होगी।
कोच वाशिंग मशीन को लगाने में खर्च भी ज्यादा नहीं है। 26 हजार रुपये में यह मशीन लगा दी गई है। महज सात मिनट में 24 कोच की रेक पूरी तरह से क्लीन हो जाएगी। इस सिस्टम में ट्रैक के दोनों तरफ बड़े ब्रश लगे होते हैं जो ट्रेन गुजरने के साथ ही घूमते रहते हैं। ट्रेन गुजरने के बाद रेक की पूरी तरह से सफाई हो जाती है।
इसकी खासियत यह है कि यह ट्रेन के टॉयलेट के निचले हिस्से को भी जल्द से जल्द साफ कर देता है। इसके साथ ही यह इसे संक्रमण मुक्त करता है। पहले परंपरागत सफाई में ऐसा नहीं हो पाता था। रेलवे की कोशिश है कि इस तरह के ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट को लगभग सभी शेड में लगाया जाए ताकि पानी की बचत हो सके।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि गोमतीनगर और मंडुआडीह के बाद औड़िहार वाशिंग पिट में अत्याधुनिक वाशिंग मशीन लगाई गई है। इसके लग जाने से ट्रेनों की धुलाई में समय के साथ ही पानी की भी बचत होगी।
ये फायदे हैं
- धुलाई के बाद 80 फीसदी पानी रिसाइकल कर दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
- ट्रेनों की साफ-सफाई में 40 से 50 प्रतिशत पानी कम खर्च होगा।
- मशीन ट्रेन की 24 बोगियों को 7 मिनट के अंदर साफ कर देगा।
- ऑटोमेटिक के कारण ट्रेन की सफाई कर्मचारी नहीं लगाने पड़ेंगे।