मां भक्ति ज्ञान गंगा सेवा संस्थान की ओर से भव्या मैरेज हाउस, आजाद चौक में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथा व्यास पंडित बालक दास ने कहा कि भागवत की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। समाज के द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और न ही बदले जा सकते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि किसी व्यक्ति को यह पता चले कि उसकी मृत्यु सातवें दिन हो जाएगी तो वो क्या करेगा, क्या सोचेगा? राजा परीक्षित ने यह जान कर उसी क्षण अपना महल छोड़ दिया। मृत्यु तो निश्चित है पर कब होगी, ये किसी को भी नहीं पता। तो ऐसे में आप जीवित रहते हुए अपने समय को क्यों बर्बाद करते हैं?
कथा व्यास ने कहा कि मानव जीवन का मोल पहचानें और इसको प्रभु के चरणों में सौंप दें। इसी से निश्चित ही कल्याण होगा। भगवान अपने बारे में मानव से हुई भूल को तो भुला सकते हैं लेकिन संतों को लेकर की गई भूल के दुष्परिणाम से वह भी नहीं बचाते। कहा कि भगवान मानव को जन्म देने से पहले कहते हैं ऐसा कर्म करना जिससे दुबारा जन्म ना लेना पड़े। मानव मुट्ठी बंद करके यह संकल्प दोहराते हुए इस पृथ्वी पर जन्म लेता है।
प्रभु भागवत कथा के माध्यम से मानव का यह संकल्प याद दिलाते रहते हैं। भागवत सुनने वालों का भगवान हमेशा कल्याण करते हैं। भागवत में कहा गया है जो भगवान को प्रिय हो वही करो, हमेशा भगवान से मिलने का उद्देश्य बना लो। जो प्रभु का मार्ग हो उसे अपना लो, इस संसार में जन्म-मरण से मुक्ति भगवान की कथा ही दिला सकती है।