पुलिस के मुताबिक, इस तरह के मामलों में अक्सर लड़की पक्ष की ओर से तहरीर में छेड़खानी या बहला फुसलाकर ले जाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं। जबकि जांच में ज्यादातर मामलों में दोनों की रजामंदी सामने आती है। पकड़े जाने पर लड़की के नाबालिग मिलने पर पुलिस उन्हें घर या महिला आश्रय केंद्र भेजती है, जबकि बालिग युगल को शादी के लिए हरी झंडी दे देती है। कुछ समय पहले ऐसे एक मामले में सरहरी चौकी में ही शादी कराई गई थी।
केस 1:
सहजनवां थाना क्षेत्र से एक किशोरी लापता हो गई। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने बहला फुसला कर भगाने का केस दर्ज किया, फिर तलाश शुरू की गई। बीते 15 अगस्त को पुलिस ने आरोपी विनय उर्फ सनी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मामला प्रेम प्रपंच का निकला, लेकिन उम्र कम होने की वजह से केस दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को जेल भिजवा दिया।
केस 2:
कैंपियरगंज इलाके से 15 साल की लड़की लापता हो गई। परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर अपहरण का आरोप लगाया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर तलाश शुरू की। चार दिन बाद पुलिस ने आरोपी राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। फिर धमकी देने की धारा बढ़ाकर उसे जेल भेज दिया गया।
केस 3:
गुलरिहा इलाके में भी एक लड़की लापता हो गई। परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाई ना करने तक का आरोप लगाया। बाद में पुलिस सक्रिय हुई तो बीते 11 अगस्त को लड़की को आरोपित उसके घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। बाद में आरोपित को भी पकड़ लिया गया।
मनोवैज्ञानिक प्रो. सुषमा पांडेय ने बताया कि पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है। कई अभिभावक घर में ओपेन सोसायटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र की संतानें इसका सही मायने समझे बिना इस सोसायटी का हिस्सा बनने की कोशिश करती हैं। फिल्में, टीवी सीरियल भी प्यार को अलग तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी, इन सारी चीजों का प्रभाव उनके रहन-सहन, सोचने के ढंग पर असर डालता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है।
समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र सिंह ने बताया कि अशिक्षा और अनुशासन की कमी की वजह से ऐसे मामले सामने आते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधि का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर अभिभावक को काउंसिलिंग करानी चाहिए। मित्रवत व्यवहार रखते हुए उन्हें सही और गलत की पहचान करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है, लेकिन ध्यान रखें कि उनका दुरुपयोग न हो।