इसी दिन भगवान बुद्ध की मनाई जाती है जयंती
गोरखपुर। वैशाख मास की पूर्णिमा व बुद्ध पूर्णिमा श्रद्धा और आस्था के साथ एक मई शुक्रवार को मनाई जाएगी। बौद्ध व हिंदू परंपराओं दोनों का विशेष महत्व है। स्नान-दान, जल सेवा और अन्नदान से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। बताया जाता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था जिसे जयंती व बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि यह दिन बौद्ध और हिंदू दोनों ही धर्मों में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और परिनिर्वाण होने की मान्यता प्रचलित है। वहीं गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार धारण किया था, वहीं बौद्ध परंपरा में यह दिन भगवान बुद्ध के जीवन की तीनों प्रमुख घटनाओं से जुड़ा है।
बताया जाता है कि बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था और उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या के बाद ज्ञान प्राप्त किया। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह पूर्णिमा विशेष फलदायी मानी जा रही है। इस दिन व्रत रखने, स्नान-दान करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से आत्मबल में वृद्धि होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं और बुद्ध के उपदेशों को स्मरण कर रहे हैं। इस दिन जरूरतमंदों को जूते-चप्पल, वस्त्र, सत्तू, फल, जल से भरे घड़े और अन्न का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।