उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर के धर्मसिंहवा की जमीन में अभी भी तमाम बौद्ध कालीन अवशेष पड़े हुए हैं। किसानों को खेतों में जुताई के दौरान तमाम प्रकार के अवशेष मिले पर जागरूकता के अभाव में वे उन सामानों का संरक्षित नहीं कर पाते हैं।
यहां पर स्थित लगभग 25 सौ वर्ष पुराना बौद्ध स्तूप अपनी दबी जुबान से यहां की ऐतिहासिकता का प्रमाण दे रहा था लेकिन संरक्षण के अभाव में यह स्तूप भी पिछले साल बारिश के मौसम में जमींदोज हो गया। हालांकि स्थानीय विधायक राकेश सिंह बघेल द्वारा बौद्ध स्तूप के संरक्षण की कवायद की जा रही थी और पर्यटन विभाग के द्वारा दो करोड़ की राशि स्वीकृत कर दी गई थी।
धम्मसंघ समिति के संस्थापक डॉक्टर सर्वेश्वर पांडे ने बताया कि कालांतर में इस स्थान का नाम धम्मसंघ हुआ करता था। धर्मसिंहवा इसका बिगड़ा हुआ नाम है। उन्होंने बताया कि गौतम बुद्ध जब सत्य की खोज के लिए निकले तब इस स्थान पर भी वे अपने अनुयायियों के साथ कुछ दिनों तक रह कर उपासना किए थे।
यहां के विकास व पर्यटन का दर्जा दिलाने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों ने प्रयास किया पर सफलता नहीं मिल सकी। बौद्ध स्तूप के अगल-बगल लगभग सैकड़ों बीघे तक के खेतों में अभी भी खुदाई के दौरान तमाम अवशेष मिलते हैं।
समिति के सदस्य रामचंद्र शुक्ला अजीजुल्लाह ने बताया कि वर्तमान विधायक राकेश सिंह बघेल द्वारा इस स्थान के संरक्षण का प्रयास किया गया है शासन से धन अवमुक्त होने के बाद इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।