सिटी स्कैन के लिए भी लंबी लाइन
सिटी स्कैन के लिए भी मरीजों को तारीखें मिल रही हैं। प्रतिदिन 30 से 40 मरीज लौटाए जा रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 15 से 20 मरीजों का ही सिटी स्कैन हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज में सिटी स्कैन के लिए मरीजों को केवल 600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जबकि, निजी पैथालॉजी में इसी जांच के लिए 1200 से 1500 रुपये वसूले जाते हैं।
एमआरआई कराने वाले 50 से 60 मरीज रोज लौट रहे
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई के कराने आने वाले 50 से 60 मरीज निराश होकर लौट रहे हैं। इन मरीजों को एक से डेढ़ माह बाद एमआरआई के लिए बुलाया जा रहा है। जुलाई में इलाज कराने आए और एमआरआई की सलाह पाने वाले 25 से ज्यादा मरीजों को अगस्त में बुलाया गया गया है। मजबूरी में परिजन निजी पैथालॉजी सेंटर से एमआरआई करा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, एमआरआई कराने की सलाह उन्हीं मरीजों को दी जाती है, जिन्हें चलने- फिरने में दिक्कत या फिर कोई और गंभीर समस्या होती है। न्यूरो से संबंधित समस्याएं भी होती हैं। अगर मेडिकल कॉलेज के भरोसे मरीज रहेंगे तो उनका मर्ज व दर्द और बढ़ जाएगा।
मेडिकल कॉलेज में सस्ती, बाहर महंगी जांच
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई की जांच 2,500 और बाहर 4,500 रुपये में होती है। एक मरीज की एमआरआई में 40-45 मिनट का वक्त लगता है। ऐसी स्थिति में प्रतिदिन 15-16 एमआरआई हो पाती है। जबकि, 65-70 मरीज एमआरआई के लिए आते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आईसीयू के कुल 26 बेड हैं। सभी बेड हमेशा फुल रहते हैं। यही वजह है कि प्रतिदिन 20 से 25 गंभीर मरीज लौटाए जा रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी सेवा शुरू होने के बाद मरीजों की संख्या और बढ़ गई है। यही कारण है कि न्यूरो, ह्दय रोग और यूरोलॉजी के मरीज लखनऊ रेफर करने पड़ रहे हैं।
हर दिन 250 से अधिक की ओपीडी, 15 से अधिक मरीज होते हैं भर्ती
हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें पांच से 10 मरीजों को भर्ती कर ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। जबकि, वार्ड में 90 बेड हैं। वहीं, इमरजेंसी की बात करें तो सबसे अधिक मरीज हड्डी विभाग के रहते हैं। इमरजेंसी में 10 से 15 मरीज प्रतिदिन भर्ती होते हैं। इमरजेंसी और ओपीडी के मरीजों को जोड़ दिया जाए तो प्रतिदिन 20 से 25 मरीज ऑपरेशन के लिए आ रहे हैं। इन मरीजों में बिहार, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, देवरिया, मऊ जैसे जिलों के शामिल हैं।
प्रतिदिन होती है 4500 से पांच हजार की ओपीडी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 20 से अधिक विभागों की ओपीडी चलती है। कुल ओपीडी की बात करें तो इनकी संख्या 4500 से पांच हजार के आसपास है। वहीं, इमरजेंसी के ट्रॉमा सेंटर की बात करें तो प्रतिदिन 70 से 80 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें 15 से 20 मरीजों को प्रतिदिन हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्राथमिकता के आधार पर मरीजों का ऑपरेशन और जांच की जा रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज गंभीर होते हैं, ऐसे में प्राथमिकता के आधार पर उनका इलाज किया जाता है। मरीजों की स्थिति के अनुसार विभाग के डॉक्टर ऑपरेशन करते हैं। गंभीर मरीजों को पहले देखा जाता है।