प्राधिकरण की तरफ से लोहिया एन्क्लेव को टाउनशिप घोषित कर देने से एन्वायरमेंटल क्लीयरेंस की जगह सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी जरूरी रह गई थी जो जीडीए को प्राप्त भी हो गई। ताल के वेटलैंड नोटिफिकेशन में जिस रकबे को वेटलैंड माना गया है, उनमें लोहिया एन्क्लेव का रकबा शामिल नहीं है, ऐसे में दूसरी और सबसे बड़ी समस्या से भी निजात मिल गई।
रामगढ़ताल वेटलैंड के लिए आपत्ति दर्ज कराने की 30 जून तक की अवधि बीतते ही प्राधिकरण एनजीटी की तरफ से नामित नोडल अफसर एवं प्रमुख सचिव सिंचाई को लोहिया एन्क्लेव के आवंटियों को कब्जा देने संबंधी एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) भेज देगा।
रिपोर्ट में बताया जाएगा कि लोहिया एन्कलेव का कोई भी रकबा वेटलैंड में नहीं आ रहा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी भी मिल गई है। यह रिपोर्ट प्रमुख सचिव आवास विकास के जरिए नोडल अफसर को जाएगी। वहां से रजामंदी मिलते ही कब्जा देने की तैयारी शुरू हो जाएगी। प्राधिकरण की तैयारी जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह से आंवटियों को कब्जा देने की है।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि प्राधिकरण की आवासीय योजना का कोई भी रकबा रामगढ़ताल वेटलैंड के दायरे में नहीं आ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी मिल चुकी है। जुलाई में आवंटियों को कब्जा देने की पूरी तैयारी है।