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महराजगंज: जंगल में बढ़ रहा 'राजा' का परिवार, ट्रैप कैमरे से ली गई तस्वीरें

Sat, 14 Mar 2020 01:05 PM IST
vivek shukla संजय कुमार पांडेय, अमर उजाला, गोरखपुर
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lion - फोटो : अमर उजाला
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सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती राज्य बिहार के इकलौते टाइगर वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी से विभाग के हौसले बुलंद हैं। बाघों की गिनती से जुड़ी रिपोर्ट डब्ल्यूआईआई देहरादून एवं नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी (एनटीसीए) को भेजी जा रही। वहां से जांच-पड़ताल के बाद बाघों की संख्या की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
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परियोजना के सीएफ हेमकांत राय ने बताया कि बाघों की गिनती के लिए पहले ट्रैकिंग पद्धति का सहारा लिया जाता था। मिट्टी में बाघों के पंजों के निशान में चूना देकर उसकी पहचान पुख्ता की जाती थी। फिर बाघों  गिनती की जाती थी। लेकिन अब, बाघों की गिनती में आधुनिक उपकरणों के सहारे तथा मैन्युअल तरीके से किया जाता। रिपोर्ट बनाने में कैमरा ट्रैप व एम-स्ट्राइप नाम के मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया गया है। मोबाइल एप एम-स्ट्राइप को संचालित करने के लिए वन अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिला है। यह मोबाइल एप जीपीएस की तरह काम करता है। पूरे दिन जंगल में गश्त करने के बाद मोबाइल एप के डाटा को टाइगर सेल में सुरक्षित रखा जाता है।

2010 में बचे थे महज आठ बाघ

बाघों के आवाजाही वाले मार्ग के दोनों ओर कैमरा लगा दिया जाता है। जब बाघ उस मार्ग से गुजरता है तो कैमरा ट्रैप में उसकी तस्वीर स्वत: कैद हो जाती है। बाद में बाघों के शरीर पर बने धारियों की मिलान की जाती है। जैसे दो इन्सानो के फिंगर प्रिंट एक नहीं हो सकते, ठीक उसी प्रकार बाघों के शरीर पर बनी धारियां भी कभी एक जैसी नहीं होती हैं।

फिलहाल जो रिपोर्ट तैयार हुई है वह सलाना गिनती रिपोर्ट है। लगभग 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले वीटीआर में साल 2000-2001 की गणना में बाघों की संख्या 30 के करीब थी। 2005-06 की गणना में यह संख्या घटकर 18 पर आ गई। वहीं वर्ष 2010 की गणना में महज आठ बाघ ही इस क्षेत्र में मिले। साल 2014 की गणना के बाद चौंकाने वाले परिणाम सामने आये और बाघों की संख्या आठ से बढ़ कर 28 हो गई। वर्ष 2018 की गणना में बाघों की संख्या 35 पहुंच गईं थी। हालांकि, वन अधिकारियों का कहना है कि इस साल की गिनती के लिए कैमरों में जो तस्वीरें कैद हुई हैं उनमें कई बाघ के शावकों के भी हैं।
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देहरादून से तय होगी वास्तविक संख्या

बाघों की वास्तविक संख्या कितनी है। इसकी औपचारिक घोषणा देहरादून से की जाएगी। वीटीआर को आठ रेंजों में बांटा गया है। अभी तक की गणना के अनुसार सभी रेंज में बाघ देखे गए हैं। गर्मी के मौसम में सभी रेंज में पानी की व्यवस्था की जा रही। जंगल में शाकाहारी जानवरों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। वन अधिकारियों का दावा है कि वीटीआर में बाघों की संख्या 40 से अधिक है।
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