गोरखपुर में हत्या कर शव छिपाने का जुर्म सिद्ध पाए जाने पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिंह ने गगहा थाना क्षेत्र के पकड़ी दूबे निवासी दुर्गेश, देवेंद्र और दीपचंद को आजीवन कारावास और 70 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। घटना में शामिल शिवमुरत, पन्ने लाल, शिवलाल व जितई को सात साल के कठोर कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शरदेंदु प्रताप नारायण सिंह का कहना था कि वादी धर्मदेव गोला थाना क्षेत्र के ग्राम नवली का निवासी है। उसने अपनी बहन चंद्रावती की शादी शिवमुरत के साथ की थी। उनकी बहन काफी दिनों से बीमार चल रही थी। वादी की लड़की रूना को उसकी बहन साल भर पहले अपने घर घरेलू काम काज करने के लिए ले गई थी।
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सात मई 2006 को शिवमूरत के पट्टीदार का लड़का वादी के घर आकर बताया कि तुम्हारी लड़की सुबह घर से कहीं भाग गई है। सूचना पाकर वादी अपनी पत्नी के साथ शिवमूरत के घर पहुंचा। जहां 12 मई 2006 को गांव के लोगों से पता चला कि अभियुक्त दुर्गेश ने देवेंद्र और दीपचंद के साथ मिलकर उसकी लड़की की हत्या कर दी और शिवमूरत, पन्ने लाल, जितई व शिवलाल के साथ मिलकर लाश को गांव के पूरब स्थित नाले में गाड़ दिया।