हड़ताल से नहीं लौटने पर शासन और प्रशासन स्तर से 15 दिसंबर के बाद से ही सख्ती शुरू हो गई थी। जिले में लेखपाल संघ के जिले और तहसील स्तर के अध्यक्ष व मंत्री समेत 32 लेखपालों को निलंबित करने के साथ ही 605 लेखपालों को सर्विस ब्रेक और ‘नो-वर्क नो-पे’ की नोटिस दिया गया। सोमवार को इन सभी लेखपालों ने भी काम किया। संघ के जिलाध्यक्ष नीलकंठ दूबे ने बताया कि अपर मुख्य सचिव राजस्व ने आश्वासन दिया है कि जितने भी लेखपालों पर कार्रवाई हुई, उसे वापस लेने के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उधर जिला प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि निलंबन वापस लिया जाएगा।
ये थी लेखपालों की मांगें
वेतन विसंगति को ठीक करने, वेतनमान बढ़ाने, राजस्व निरीक्षक के पदों में वृद्धि, राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार पदों पर पदोन्नति एवं विभागीय परीक्षा के माध्यम से लेखपालों को अधिक अवसर प्रदान करने, पदनाम परिवर्तित कर लेखपाल के स्थान पर उप राजस्व निरीक्षक किए जाने, मोटर साइकिल भत्ता देने, पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थियों के सत्यापन के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध कराना आदि।