सीमएओ ने बताया कि एमडीआर मरीजों का इलाज बेहद कठिन हो जाता है। उनकी दवा में एडवर्स इफेक्ट भी ज्यादा देखने को मिलते हैं। मृत्यु दर भी इन मरीजों में ज्यादा देखी गई है। एचआईवी और मधुमेह वाले एमडीआर मरीज ज्यादा खतरे में होते हैं। ऐसे में बिना डॉक्टर के सलाह के दवा न छोड़ें।
जांच कराकर एमडीआर मरीजों का लगाएं पता
सीएमओ ने जिला क्षय रोग विभाग को निर्देश दिया है कि 2025 तक हर हाल में जिले को टीबी मुक्त करना है। ऐसे में एमडीआर मरीजों का पता लगाकर उनकी जांच कराएं। क्योंकि, ये मरीज ज्यादा खतरनाक होते हैं। एक एमडीआर मरीज 15 से 20 सामान्य नागरिकों को टीबी दे सकता है। उन्होंने बताया कि 49 डेजिगनेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी) हैं, जहां एमडीआर जांच की जाती है।