गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के फैकल्टी ऑफ हेल्थ एंड लाइफ साइंसेज की तरफ से दीक्षारम्भ-2026 के अंतर्गत नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए शुक्रवार को ‘विज्ञान, चिकित्सा और संगीत’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध सितार वादिका प्रो. ऊषा सिंह ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत मानव जीवन को संतुलित करने वाली दिव्य साधना है। चिकित्सा विज्ञान में भी संगीत चिकित्सा का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि विज्ञान और चिकित्सा के साथ संगीत की संवेदनशीलता जुड़ जाए तो चिकित्सक केवल रोग का उपचार ही नहीं बल्कि रोगी के मन और आत्मा को भी स्वस्थ बनाने में सक्षम हो सकता है।
व्याख्यान के उपरांत प्रो. ऊषा सिंह ने अपनी मनमोहक सितार वादन प्रस्तुति से पूरे सभागार को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. वर्षा एम. ने कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा का उद्देश्य केवल दक्ष चिकित्सक तैयार करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, मानवीय और समग्र व्यक्तित्व वाले स्वास्थ्यकर्मी विकसित करना भी है। मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अधिष्ठाता प्रो. राजीव सक्सेना, फैकल्टी ऑफ हेल्थ एंड लाइफ साइंसेज के विभागाध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. संदीप कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर नवप्रवेशी विद्यार्थियों सहित डॉ. अमित दुबे, डॉ. प्रेरणा अदिति, डॉ. रश्मि, डॉ. पवन कन्नौजिया, डॉ. अवेद्यनाथ, डॉ. धनंजय पांडेय आदि उपस्थित रहे।