गोरखपुर। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच में एसटीएफ और कैंट पुलिस के सामने भागे आरोपियों की गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई है। कई राज्यों में फैले नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही एसटीएफ ने नेपाल सीमा के आसपास डेरा डाल रखा है।
आरोप है कि पुलिस की दबिश की भनक लगते ही आरोपी ठिकाना बदल लेते हैं। टीम के पहुंचने से पहले ही सीमा पार निकल जाने के कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। पुलिस अब आरोपियों के संपर्कों और उनकी आवाजाही से जुड़े इनपुट के आधार पर तलाश में जुटी है।
इस मामले में बिहार के पश्चिमी चंपारण क्षेत्र से जुड़े शशांक पांडेय उर्फ पंडित की तलाश जारी है। उसकी संभावित भूमिका और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है लेकिन अब तक उसका सुराग नहीं लग सका है। नेपाल सीमा के आसपास जिन अन्य संदिग्धों की लोकेशन मिलने की जानकारी सामने आई है, उनमें हरियाणा के सोनीपत निवासी सुमित कुमार दिलावर और कुशीनगर क्षेत्र से जुड़े आकाश सिंह, आसिफ तथा कृष्णा काका के नाम शामिल हैं। इनकी तलाश में साइबर सेल के साथ स्थानीय पुलिस की भी मदद ली जा रही है।
मामले में एसटीएफ इंस्पेक्टर की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 31 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें से 21 को पुलिस जेल भिजवाया चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। भागे आरोपियों के तीन परिजन को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई है।
नेपाल सीमा से सटे गांवों में छिपने की सूचना
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, गिरोह के कुछ गुर्गों के नेपाल सीमा से सटे गांवों में पनाह लेने की सूचना मिली थी। इसके बाद एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस की मदद से इन इलाकों में दबिश दी। हालांकि टीम के पहुंचने से पहले ही आरोपी वहां से निकल गए। जांच एजेंसियों को आशंका है कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं और दबिश की भनक लगते ही नेपाल की ओर चले जाते हैं। ऐसे में पुलिस उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ स्थानीय संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।
हथियारों की सप्लाई चेन तोड़ने पर जोर
16 सितंबर को विंध्यवासिनी पार्क के पास पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा था। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती कार्रवाई में चार पिस्टल, एक रिवॉल्वर और कारतूस बरामद हुए थे। पूछताछ में मध्य प्रदेश के सेंधवा और हरियाणा के सोनीपत से हथियार लाकर पूर्वांचल में बेचने की जानकारी सामने आई थी। अब एसटीएफ हथियारों की खरीद, उनकी ढुलाई और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति से जुड़े संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खातों और लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल के जरिये यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और हथियार किन रास्तों से पूर्वांचल तक पहुंचाए जाते थे।
कोट
मामले में भागे आरोपियों की तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संबंधित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। आरोपियों के संपर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- सत्यप्रकाश सिंह, एसटीएफ इंस्पेक्टर