ग्राम पंचायत पटना के पूर्व प्रधान और प्रधान संगठन गोरखपुर के जिला प्रभारी हृदय शंकर सिंह ने कहा कि पुराने पुल की बार-बार मरम्मत कराने के बजाय उसके समानांतर दो लेन के नए पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन समय रहते स्थायी समाधान निकाले, ताकि आवागमन सुरक्षित बना रहे।
उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले रामजानकी मार्ग स्थित उग्रसेन सेतु (पटना घाट पुल) पर सड़क धंसने से एक बार फिर आवागमन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। गोरखपुर और देवरिया जिले की सीमा पर पुल के जिस हिस्से में पहले क्षति हुई थी, उसके पास ही दोबारा बड़ा गड्ढा बन गया है। इससे राहगीरों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है।
हजारों वाहनों की आवाजाही पर असर
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यह पुल गोरखपुर और देवरिया के बीच आवागमन का प्रमुख मार्ग है। इससे प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सड़क धंसने से भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। इससे स्थानीय व्यापारियों, दैनिक यात्रियों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वैकल्पिक मार्ग से आने-जाने पर लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है।
स्थायी मरम्मत और नए पुल की मांग
स्थानीय पूर्व प्रधान हृदय शंकर सिंह, संजय गुप्ता समेत अन्य नागरिकों ने पुल की बार-बार खराब हो रही सड़क पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क फिर क्षतिग्रस्त हो जाती है।
ग्राम पंचायत पटना के पूर्व प्रधान और प्रधान संगठन गोरखपुर के जिला प्रभारी हृदय शंकर सिंह ने कहा कि पुराने पुल की बार-बार मरम्मत कराने के बजाय उसके समानांतर दो लेन के नए पुल का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन समय रहते स्थायी समाधान निकाले, ताकि आवागमन सुरक्षित बना रहे और किसी बड़े हादसे की आशंका को दूर किया जा सके।