जर्जर हो चुकी थीं 31 दुकानें
आराजी संख्या-1, 2, 3, 4, 5, 6 रकबा 46 डिसमिल 9 कड़ी जमीन सहन अस्तबल जम्मन 15 (2) मिनिबल बोर्ड खाता संख्या-3 में 12 आवासीय में 12 आवासीय एवं 31 व्यवसायिक दुकानें थीं। सभी पूरी तरह से ही जर्जर हो चुकीं थी। निगम के अधिकारियों का कहना है कि लोगों को कभी भी जान माल का खतरा उठाना पड़ सकता था।
अधिशासी अभियंता की रिपोर्ट पर नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 331(1) के अंतर्गत परिसर के आवासित दुकानों-मकानों से संबंधित व्यक्तियों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की। जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले से अवगत कराते हुए 20 जनवरी को पुलिस बल की मांग की गई थी। निर्धारित तिथि बुधवार को पुलिस बल की मौजूदगी में धवस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई।