ज्ञापन देने जाते पीपीगंज के लोग।
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गोरखपुरि जिले के पीपीगंज कस्बे की जिस भूमि पर 60 वर्षों से मकान बनाकर लोग आबाद हैं, उसे कृषि व आवासीय दिखाकर बेच दिया गया। इससे 11 परिवारों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है। इन लोगों ने गोरखनाथ मंदिर स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ितों का कहना है कि पुरानी भूमि बेचने के इस खेल में ‘बड़ों’ का हाथ है। जांच हुई तो सब कुछ सामने आ जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, पीपीगंज कस्बे में प्रेमचंद्र पुत्र स्व लाल बिहारी, अनिल कुमार पुत्र स्व. गंगाजल, पुरुषोत्तम पुत्र राम सरन, चौथी प्रसाद पुत्र रामआसरे, राकेश पुत्र रामआसरे, रतनलाल पुत्र रामनरेश, बहराइची पुत्र स्व रामकेवल, महेंद्र पुत्र वशिष्ठ, चंद्रभान पुत्र नानू, भागमनी देवी पत्नी स्व संतराज, देवप्रकाश पुत्र स्व कैलाश का आवास है। इनके मुताबिक आराजी नंबर 904क, 910, 913, 874 पर पिछले 60 वर्षों से काबिज हैं।
इधर पता चला कि जिस भूमि पर मकान बने हैं, उसे कृषि व आवासीय दिखाकर बैनामा कर दिया गया। तहसील प्रशासन ने जांच भी नहीं कराई और खारिज-दाखिल कर दिया। अब भूमि खाली कराने की धमकी दी जा रही है। इन लोगों का कहना है कि अपना आवास ढहाकर कहां जाएं? मुख्यमंत्री से ही राहत की उम्मीद है।
भूमि खरीदार संतोष सिंह ने बताया कि भूमि खाली समझकर ही खरीदी थी। आवास बने हैं, इसकी जानकारी नहीं थी। जल्द ही मामले को सुलझा लेंगे।