सब रजिस्ट्रार चंद्रशेखर शाही को गिरफ्तार करने के साथ ही पुलिस अब पूरे नेटवर्क को खंगालने लगी हैं। पुलिस की जांच में इतना तो साफ हो गया है कि पूरा नेटवर्क सरकारी कर्मचारियों के सांठगांठ से चल रहा था। यही वजह है कि सब रजिस्ट्रार को जेल भेजने के साथ ही पुलिस अब अन्य कर्मचारियों के भूमिका की जांच कर रही है।
सूत्रों की माने तो कमलेश यादव ने सब रजिस्ट्रार के अलावा चार अन्य लोगों का नाम भी बताया है, जिन्होंने तहसील में फर्जी रजिस्ट्री में उसकी मदद की थी। पुलिस एक-एक की भूमिका की जांच कर रही थी। पुलिस साक्ष्य संकलन कर रही है। पुलिस के हाथ कुछ साक्ष्य भी लग गए हैं, जिसकी मदद से जांच में कई और लोगों का गर्दन फंसना तय माना जा रहा है।
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अब पुलिस उसकी तलाश कर रही है, जो सीलिंग की जमीन के बारे में तहसील में जाकर पूछने पर खरीदने वाले को यह बता देता था कि जमीन सीलिंग नहीं, बल्कि कमलेश यादव की है। वह कूटरचित खतौनी तक उपलब्ध करा देता था। वैसे तो कमलेश ने इसमें भी एक सरकारी कर्मचारी का नाम उगला था, पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है। पुलिस जांच कर रही है कि कहीं कमलेश का कोई साथी ही तो नहीं था, जो तहसील में खरीदार के जाने के समय मौजूद रहता था और बता देता था कि जमीन कमलेश की है।