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नए गोरखपुर के लिए नया फार्मूला: बैनामे और सर्किल रेट के औसत से तय होगी मुआवजे की रकम

Thu, 08 Jun 2023 03:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

डीएम कृष्णा करूणेश की मौजूदगी में जीडीए के ओएसडी प्रदीप सिंह सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच मुआवजे की रकम को लेकर चर्चा हुई। नया गोरखपुर बसाने में आ रहे मुआवजे का पेंच खत्म करने के लिए तय किया गया छह माह के भीतर हुई रजिस्ट्री का ब्यौरा जुटाएंगे। सर्किल रेट और भूमि की रजिस्ट्री की दर का एक औसत निर्धारित किया जाएगा।
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गोरखपुर शहर। - फोटो : राजेश कुमार
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विस्तार
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नया गोरखपुर परियोजना, जंगल कौड़िया-सोनौली रिंग रोड के निर्माण में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के विरोध को देखते हुए प्रशासन स्तर पर नया फार्मूला तैयार किया गया है। अब छह माह के भीतर हुई रजिस्ट्री का ब्यौरा निबंधन कार्यालय से निकालकर उसकी जानकारी ली जाएगी। सर्किल रेट और भूमि की रजिस्ट्री की दर का एक औसत निकाला जाएगा। जो ज्यादा होगा उसी के आधार पर ही किसानों को मुआवजे की रकम दी जाएगी।

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प्रशासन और जीडीए अधिकारियों ने बुधवार को डीएम सभागार में बैठक की। डीएम कृष्णा करूणेश की मौजूदगी में जीडीए के ओएसडी प्रदीप सिंह सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच मुआवजे की रकम को लेकर चर्चा हुई। नया गोरखपुर बसाने में आ रहे मुआवजे का पेंच खत्म करने के लिए तय किया गया छह माह के भीतर हुई रजिस्ट्री का ब्यौरा जुटाएंगे।

सर्किल रेट और भूमि की रजिस्ट्री की दर का एक औसत निर्धारित किया जाएगा। इसके आधार पर ही किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे की दर तय होगी। इसके आधार पर किसानों से बात की जाएगी। यही फार्मूला जंगल कौड़िया-सौनौली रिंग रोड के जमीन अधिग्रहण में भी लागू किया जाएगा।
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सीएम का निर्देश है बातचीत से सुलझाएं मामला, किसानों को समझा लेंगे
इस समय हमारे दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट नया गोरखपुर और जंगल कौड़िया-सोनौली के जमीन अधिग्रहण में कुछ जगहों पर किसान बाजार रेट देने की मांग कर रहे हैं। दोनों जगहों पर बहुत सारे किसान संतुष्ट हो गए हैं। मुख्यमंत्री का भी निर्देश है कि बातचीत से ही किसानों को संतुष्ट करें और कोई रास्ता निकालें।

कौड़िया-सोनौली रिंग रोड में एक-दो गांव का ही मुद्दा फंसा है। जबकि, नया गोरखपुर में तो सौ एकड़ जमीन के मालिकों ने लिखित सहमति दे दी है। बस कुछ लोग हैं जो किसानों को भड़का रहे हैं। लेकिन, बहुत जल्द ही इस मसले को सुलझा लेंगे। यह कहना है डीएम कृष्णा करूणेश का।

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बुधवार को उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में जमीनों के अधिग्रहण में किसानों के विरोध के बाद नए विकल्प के बारे में रणनीति साझा की। डीएम ने कहा कि हम किसानों को लगातार समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर रिंग रोड में 10 से 20 मीटर जमीन जाएगी तो बाकी बचे खेत की कीमत भी बहुत तेजी से बढ़ जाएगी। उन्हें इसे समझना होगा।

इसी प्रकार नया गोरखपुर प्रोजेक्ट भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिस तरह से शहर में आबादी बढ़ी है, अब जमीनें ही नहीं हैं। हमें नया गोरखपुर बसाना ही पड़ेगा। प्रशासन ने तो किसानों को बातचीत के लिए खुला आमंत्रण दे दिया है।

इसके लिए फार्मूला भी तैयार कर लिया गया है। हम तो कह रहे हैं कि सर्किल रेट से अगर तैयार नहीं है तो पिछले छह महीने में जिन किसानों ने रजिस्ट्री कराई है उसका स्टांप ड्यूटी निकाल लेते हैं। एक औसत निकालकर वहीं कीमत मुआवजे का तय कर देंगे। दो से तीन दिनों में एक बार फिर जीडीए, एनएचएआई और प्रशासन के लोग किसानों से बातचीत करने जाएंगे। पूरा विश्वास है कि किसान हमारी बातों को समझेंगे और मसला सुलझ जाएगा।

दो-तीन दिनों में किसानों के बीच जाएंगे, नए विकल्प समझाएंगे
सचिव जीडीए उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नया गोरखपुर परियोजना में जमीन देने के लिए किसान तैयार नहीं हैं। किसान बाजार भाव के आधार पर मुआवजा मांग रहे हैं। इससे जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है। किसानों का विरोध सामने आने पर प्रशासनिक अधिकारी इसका विकल्प तलाशने में जुटे हैं। छह माह में बाजार भाव पर हुई रजिस्ट्री का आंकड़ा निकालकर सर्किल रेट के आधार पर औसत तय किया जाएगा। इसके बाद मुआवजे की रकम किसानों को दी जाएगी। दो से तीन दिनों में किसानों के बीच जाएंगे और उनसे बात कर रास्ता निकाल लेंगे।


 
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