बुधवार को उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में जमीनों के अधिग्रहण में किसानों के विरोध के बाद नए विकल्प के बारे में रणनीति साझा की। डीएम ने कहा कि हम किसानों को लगातार समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर रिंग रोड में 10 से 20 मीटर जमीन जाएगी तो बाकी बचे खेत की कीमत भी बहुत तेजी से बढ़ जाएगी। उन्हें इसे समझना होगा।
इसी प्रकार नया गोरखपुर प्रोजेक्ट भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। जिस तरह से शहर में आबादी बढ़ी है, अब जमीनें ही नहीं हैं। हमें नया गोरखपुर बसाना ही पड़ेगा। प्रशासन ने तो किसानों को बातचीत के लिए खुला आमंत्रण दे दिया है।
इसके लिए फार्मूला भी तैयार कर लिया गया है। हम तो कह रहे हैं कि सर्किल रेट से अगर तैयार नहीं है तो पिछले छह महीने में जिन किसानों ने रजिस्ट्री कराई है उसका स्टांप ड्यूटी निकाल लेते हैं। एक औसत निकालकर वहीं कीमत मुआवजे का तय कर देंगे। दो से तीन दिनों में एक बार फिर जीडीए, एनएचएआई और प्रशासन के लोग किसानों से बातचीत करने जाएंगे। पूरा विश्वास है कि किसान हमारी बातों को समझेंगे और मसला सुलझ जाएगा।
दो-तीन दिनों में किसानों के बीच जाएंगे, नए विकल्प समझाएंगे
सचिव जीडीए उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नया गोरखपुर परियोजना में जमीन देने के लिए किसान तैयार नहीं हैं। किसान बाजार भाव के आधार पर मुआवजा मांग रहे हैं। इससे जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है। किसानों का विरोध सामने आने पर प्रशासनिक अधिकारी इसका विकल्प तलाशने में जुटे हैं। छह माह में बाजार भाव पर हुई रजिस्ट्री का आंकड़ा निकालकर सर्किल रेट के आधार पर औसत तय किया जाएगा। इसके बाद मुआवजे की रकम किसानों को दी जाएगी। दो से तीन दिनों में किसानों के बीच जाएंगे और उनसे बात कर रास्ता निकाल लेंगे।