फर्जी आईएएस ठग ललित की क्राइम कुंडली
शातिर ठग ललित किशोर मूलरूप से सीतामढ़ी (बिहार) के मेहसौल का रहने वाला है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले सीतामढ़ी में सुपर 100 कोचिंग सेंटर में गणित का शिक्षक था। वर्ष 2023 में वह एडमिशन के नाम पर दो लाख रुपये लेने के आरोप में कोचिंग से निकाल दिया गया। एमएससी के बाद वह मैथ से पीएचडी कर रहा था, लेकिन इसी दौरान उसने फर्जी पहचान और दिखावे के सहारे ठगी का रास्ता अपना लिया।
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में ललित के साले अभिषेक कुमार और गोरखनाथ क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी परमानंद गुप्ता भी शामिल हैं। यह गिरोह झुगिया बाजार में बने एक आलीशान दफ्तर से ठगी का जाल फैलाता था, जहां बाहर आईएएस गौरव कुमार की नेम प्लेट, सरकारी पट्टिकाएं और हूटर लगी गाड़ियां खड़ी रहती थीं।
साथ में 10-12 लोग बाडीगार्ड की तरह खड़े रहते थे। इसी तामझाम से लोग आसानी से विश्वास में आ जाते थे। यहीं नहीं ललित किशोर कई निजी स्कूलों में निरीक्षण कर चुका था और कई आयोजनों में चीफ गेस्ट बनकर शामिल हुआ था, जिससे उसकी विश्वसनीयता और बढ़ गई थी।
बिहार के युवक से धन, गाड़ियां और दस्तावेज हथियाए
पटना के मोकामा निवासी पीड़ित मुकुंद माधव को आरोपी ने सितम्बर 2024 में अररिया के एक होटल में बताया कि वह आईएएस है और बड़े सरकारी टेंडर दिलवाता है। विश्वास में लेकर उसने पीड़ित को गोरखपुर बुलाया। दफ्तर का रौब देखकर मुकुंद माधव पूरी तरह झांसे में आ गया और पहले दिन ही 10 लाख रुपये कैश दे दिए। इसके बाद अप्रैल 2025 से आरोपी कई बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 70 लाख रुपये ट्रांसफर कराता रहा।
अलग-अलग मौकों पर 25 लाख रुपये नगद और दो लग्जरी वाहन स्कॉर्पियो और इनोवा भी ले लिए। जुलाई 2025 में जब पीड़ित ने टेंडर की स्थिति पूछी तो ललित ने एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी अनुमोदन पत्र, भवन आवंटन की फाइलें और अखबारों की कटिंग भेजकर भ्रमित कर दिया। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे तो आरोपी और उसके साथियों ने गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी। घबराकर पीड़ित ने 6 दिसंबर को गुलरिहा थाने में तहरीर दी, जिस पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई तेज की।
आरोपियों के पास से यह सामान बरामद
4,15,500 लाख रुपये कैश, भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण, पासपोर्ट, एटीएम, पासबुक-चेकबुक, लैपटॉप, मोबाइल, फर्जी आईडी कार्ड, मोहरें, नेम प्लेट, एआई आधारित कूटरचित अनुमोदन पत्र, टेंडर डॉक्यूमेंट।
पुलिस अब गिरोह के लगभग 25-30 सदस्यों की भूमिका खंगाल रही है। करोड़ों की ठगी और फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा मामला होने के कारण जांच हाई प्रोफाइल धोखाधड़ी की श्रेणी में की जा रही है। पुलिस ने अन्य पीड़ितों से भी सामने आने की अपील की है। -अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
किराए के वाहन व लोगों का इस्तेमाल कर बनाते थे रौब
पूछताछ में ललित किशोर ने बताया कि उसने फर्जी नाम और आईडी कार्ड रौब जमाने व लोगों को ठगने के लिए बनवाए थे। गिरोह किराए के वाहन और सहयोगियों को साथ लेकर चलता था ताकि लोग उन्हें उच्च अधिकारी समझें। अभिषेक कुमार और परमानंद गुप्ता एआई और अन्य माध्यमों से फर्जी दस्तावेज तैयार कर ललित को भेजते थे, जो आगे वादी को भेजे जाते थे। दस्तावेज देखकर पीड़ित को विश्वास हो गया कि उसका टेंडर स्वीकृत हो चुका है।