कमिश्नर जयंत नार्लिकर, डीआईजी राजेश डी मोदक, डीएम के. विजयेंद्र पांडियन, एसएसपी डॉ सुनील गुप्ता ने रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर ही रेलवे, स्वास्थ्य, जीआरपी और आरपीएफ आदि विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई।
कमिश्नर ने बताया कि ट्रेन के पहुंचने पर किसका क्या रोल होगा, कैसे लोग जनपद में भेजे जाएंगे। कैसे उन्हें क्वारंटीन किया जाएगा इसी को लेकर बैठक में जिम्मेदारी बांटी गई है। श्रमिकों की सुविधा का पूरा इंतजाम किया गया है।
सभी का बारी-बारी से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। संदेह होने पर उस व्यक्ति को तत्काल आइसोलेट कराया जाएगा। बाकी सभी को उनके संबंधित क्षेत्रों में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाएगा।
परिवहन निगम के एमडी राजशेखर के निर्देश पर आपातकालीन स्थिति में लोगों को उनके गंतव्यों तक पहुंचाने के लिए गोरखपुर डिपो की 80 बसें तैयार कर ली गई हैं। आरएम डीवी सिंह ने बताया कि बसों को सैनिटाइज करा दिया गया है। चालक और परिचालकों को आपातकालीन सेवाओं के लिए तैयार रखा गया है। प्रशासन को जब भी बस की आवश्यकता होगी उन्हें उपलब्ध करा दी जाएंगी।
11 बस से आए 253 प्रवासी मजदूर
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों, झांसी और दिल्ली की ओर से आने वाले 253 मजदूर शनिवार को 11 बसों से गोरखपुर की सीमा पर पहुंचे। इनमें 31 प्रवासी मजदूर गोरखपुर जिले के हैं।
सभी की थर्मल स्कैनिंग करने के बाद सहजनवां चौराहे पर उनकी जानकारी दर्ज की गई। उसके बाद गोरखपुर के मजदूरों को जिले की तहसीलों में क्वारंटीन करने के लिए भेजा गया जबकि कुशीनगर, बिहार, महराजगंज के मजदूरों की बसों को बाहर ही बाहर फोरलेन से रवाना कर दिया गया।