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कुशीनगर में टूटा एपी बांध: गांवों में घुसा पानी, 30 से अधिक गांव बाढ़ से हो सकते हैं प्रभावित; खाली कराए गए

Tue, 29 Sep 2026 03:53 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर

सार

कुशीनगर बाढ़ अलर्ट: कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील में सोमवार रात एपी बांध का करीब 10 मीटर हिस्सा टूट गया। जवही दयाल और बिरवट कोनवलिया के बीच गौरहा गांव के सामने बांध टूटने से पांच गांवों में पानी घुस गया है। साथ ही 30 से अधिक गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। बांध के आसपास के 10 गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
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गौरहा गांव के सामने टूटा एपी बांध, बाइक पर बैठकर कटान स्थल जाते एएसपी और एडीएम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील के जवही दयाल और बिरवट कोनवलिया के बीच गौरहा गांव के सामने सोमवार की रात 10.30 बजे एपी बांध 10 किमी लंबाई में टूट गया। कटान स्थल पर मौजूद तीन चार लोग पानी में गिर गए। रस्सी की मदद से उनको बचाया गया। 
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इसकी खबर मिलते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। दस किमी के दायरे में आने वाले गांवों को खाली कराया जा रहा है। 30 से अधिक गांवों में अफरा-तफरी का माहौल है। लोग जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। 

एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी बचाव कार्य में जुट गई है। टूटे हुए बांधे पर काबू नहीं पाया गया तो 50 से अधिक गांव प्रभावित हो सकते हैं और बड़ा नुकसान हो सकता है। प्रशासन की टीम बंधे पर कैंप कर रही है।
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नारायणी (गंडक) नदी में पांच लाख क्यूसेक से अधिक पानी होने के बाद एपी तटबंध पर दबाव बढ़ गया था। जवही दयाल से विरवट कोनवलिया के बीच गौरहा गांव के सामने रविवार की रात से रिसाव हो रहा था। सोमवार को दोपहर तक बचाव कार्य चला। 

 

बंधे की निगरानी की जा रही थी। रात करीब 10.30 बजे बंधे से तेज रिसाव शुरू हुआ और देखते ही देखते करीब दस मीटर लंबाई में बांध टूट गया। बंधे पर मौजूद पुलिसकर्मी, बाढ़ खंड के कर्मचारियों ने भाग कर जान बचाई। आनन-फानन प्रधानों व सचिव,लेखपाल और पंचायत सहायकों की मदद से गांव खाली कराया जाने लगा। 
 

तटवर्ती गांव जवही दयाल, गौरहा, सिसवा नाहर, बाघ खास, बिरवट कोनवलिया, बेदुपार, तरयासुजान, खैरटिया समेत 30 से अधिक गांवों से लोग भागने लगे। लोगों को तमकुहीराज कस्बा समेत अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। 

 

पानी का बहाव तेज होने के कारण बचाव कार्य में परेशानी आ रही है। लोगों का कहना है कि टूटे बांध को ठीक नहीं किया गया तो तबाही मच सकती है। बीस से अधिक स्थानों पर बंधे से सीपेज को लेकर प्रशासन सतर्क है।

गौरहा गांव के सामने एपी बांध टूटा है, बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। तटवर्ती गांवों को खाली कराया जा रहा है। इसके लिए तहसील प्रशासन की ओर से गांवों में सूचना पहुंचा दी गई है। नजदीक के गांव के लोग पहले से सतर्क थे। -महेश कुमार सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड कुशीनगर

पानी का अधिक दबाव होने के कारण रविवार की रात से एपी बांध पर रिसाव हो रहा था। बचाव कार्य जारी था। अचानक रात में तेज रिसाव के बाद बांध टूट गया है। गांवों को खाली कराया जा रहा है। लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए टीम लग गई है। मौके पर मैं खुद पहुंचा हूं। बांध को ठीक करने में बाढ़ खंड के अधिकारी लगे हैं। -संजय चौहान, डीएम कुशीनगर
 

बाढ़ के पानी से घिरे गांव,बंधे पर लोगों ने लिया शरण
गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण पिपराघाट क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया है। बांसी और गंडक नदी के दोआबे में स्थित यह क्षेत्र जलमग्न हो गया है। कई गांवों के चारों तरफ पानी भर गया है और सड़कों पर भी जलभराव है। सेवरही विकास खंड का पिपराघाट ग्राम सभा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। गंडक नदी का पानी जीरो पुल के रास्ते बांसी नदी में उल्टा बहकर दोआबे में आता है। 

 

पिछले तीन-चार दिनों से नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से गंडक नदी उफान पर है। इसका पानी दोआबा के गांवों के चारों तरफ तेजी से फैल रहा है। तवकल टोला, दहारी टोला, इमिलिया टोला, मुसहरी टोला, हनुमान टोला, शिव टोला, चौकी टोला, जोगनी, गोलाघाट, देवनारायण टोला, उपाध्याय टोला और मोतीराय टोला सहित अनेक गांव पानी से घिर गए हैं। 

 

जवही दयाल का ततवा टोला गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। खेतों में भी पानी भर गया है, जिससे फसलों के बर्बाद होने का खतरा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।

पांच गांव जलमग्न, 20 हजार आबादी तीन दिन से बेहालख
गंडक नदी की बाढ़ ने खड्डा विकास खंड के पांच गांवों को प्रभावित किया है। मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर और नारायनपुर के करीब 20 हजार लोग तीन दिन से पानी में घिरे हैं। घरों में पानी भरा है और सड़कें डूब गई हैं। इन गांवों में आवागमन और भोजन सामग्री पहुंचाने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। सोमवार को मरचहवा गांव से कुछ महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर निकाला गया। लोग छतों, ऊंचे हिस्सों और मचानों पर शरण लिए हुए हैं। शुद्ध पेयजल और दैनिक कार्यों के लिए ग्रामीणों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बाढ़ प्रभावित लोगों ने बताया कि उनका अनाज, कपड़े और बच्चों की किताबें खराब हो गई हैं। 
 

खैरटिया गांव में बाढ़ का पानी घुसा
नारायणी नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है। इसके कारण अमवाखास तटबंध के किनारे बसे खैरटिया गांव में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। लगभग 23 परिवारों के घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। ग्रामीण अपनी जरूरत का सामान लेकर तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। सुबह खैरटिया गांव के एक दर्जन घरों में पानी घुसा था। खैरटिया गांव दो हिस्सों में बंटा हुआ है। रिंग बांध और नदी के बीच एक छोटा बांध है। यह बांध आने-जाने के लिए बना हुआ है। सुबह से ही छोटेलाल बांध पर पानी टकराने से रिसाव हो रहा था। दोपहर बाद यह बीच का बांध रिसाव के कारण टूट गया। 

लाल निशान से नीचे नहीं आई नदी,5.43 लाख क्यूसेक रहा डिस्चार्ज
वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में सोमवार को इस सीजन का सर्वाधिक 5.435 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसके बाद से डिस्चार्ज में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। हालांकि, नदी खतरे के निशान से नीचे नहीं आई है।
 

सोमवार भोर में चार और पांच बजे सर्वाधिक डिस्चार्ज हुआ। छह बजे डिस्चार्ज घटकर 5 लाख 10 हजार 555 क्यूसेक हो गया। सात और आठ बजे यह 4 लाख 97 हजार 200 क्यूसेक रहा। नौ बजे 4 लाख 78 हजार 100 क्यूसेक और दस बजे 4 लाख 70 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। 11 बजे 4 लाख 49 हजार 250 क्यूसेक तथा दोपहर 12 और एक बजे 4 लाख 28 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। डिस्चार्ज बढ़ने के कारण सोमवार सुबह आठ बजे भैंसहा गेज पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। यह 96 मीटर के खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर 96.43 मीटर दर्ज किया गया।
 

अब जलस्तर में भी धीरे-धीरे गिरावट शुरू हो गई है। यह स्थिति क्षेत्रीय लोगों के लिए थोड़ी राहत भरी है।गंडक नदी का डिस्चार्ज घटने से तटबंध किनारे बसे कई गांवों के लोगों को कुछ राहत मिली है। इनमें हनुमानगंज, भैंसहा, भेड़िहारी, मदनपुर सुकरौली और गैनही जंगल जैसे गांव शामिल हैं। नदी का जलस्तर कम होने से इन क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा थोड़ा टला है। यह कमी लोगों के लिए सकारात्मक संकेत है।

इसके बावजूद क्षेत्रीय तटबंध पर नदी का दबाव है। ठोकर संख्या एक, दो, भैंसहा गेज के पास और बीरभार ठोकर पर नदी का दबाव बरकरार है। 14.400 किलोमीटर लंबे छितौनी तटबंध पर संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है। अभियंता और विभागीय कर्मचारी पूरी तरह चौकस रहकर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

5 गांवों में घुसा पानी, 30 पर खतरा
बांध टूटने से आसपास के 10 गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा

तमकुहीराज तहसील में सोमवार रात एपी बांध का करीब 10 मीटर हिस्सा टूट गया। जवही दयाल और बिरवट कोनवलिया के बीच गौरहा गांव के सामने बांध टूटने से पांच गांवों में पानी घुस गया है। साथ ही 30 से अधिक गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। बांध के आसपास के 10 गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
 

नेपाल से कुछ दिनों से लगातार पानी का डिस्चार्ज हो रहा है। रविवार रात तक पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण नारायणी नदी के तटबंध पर दबाव बढ़ गया था। रविवार रात से गौरहा गांव के सामने बांध से रिसाव हो रहा था। सोमवार दोपहर तक बचाव कार्य चला और बंधे की निगरानी की जा रही थी। रात करीब 10.30 बजे तेज रिसाव के बाद बांध अचानक टूट गया।

कटान स्थल पर ड्यूटी कर रहे बाढ़ खंड के तीन-चार कर्मचारी पानी में गिर गए, जिन्हें रस्सी फेंक कर बचाया गया। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और दस किलोमीटर के दायरे के गांवों को खाली कराना शुरू कर दिया। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की टीमें बचाव कार्य में जुट गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि टूटे बांध पर काबू नहीं पाया गया, तो करीब 30 गांव प्रभावित हो सकते हैं।
 
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बांध टूटने की खबर मिलते ही प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। बांध के आसपास के करीब 10 गांवों के लोग जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। प्रधानों, सचिवों, लेखपालों और पंचायत सहायकों की मदद से गांव खाली कराए जा रहे हैं। जवही दयाल, गौरहा, सिसवा नाहर, बाघ खास, बिरवट कोनवलिया जैसे गांव प्रभावित हैं। बाढ़ खंड कुशीनगर के एक्सईएन महेश कुमार सिंह ने बताया कि तटवर्ती गांवों को खाली कराया जा रहा है।
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