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अमर उजाला बाल मेला: मेडल पाकर खिले चेहरे, सीएम ने सुनाई कविता; बोले- हार न मानें, ठान लें और कुछ करके दिखाएं

Tue, 29 Sep 2026 12:09 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

मुख्यमंत्री योगी सोमवार को दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के सभागार में अमर उजाला के बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। बाल मेले का आयोजन पिछले साल 14 नवंबर 2025 और 24 जनवरी 2026 को किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कुल 66 बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता बनने पर मेडल पहनाकर सम्मानित किया। 
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अमर उजाला बाल मेला में सीएम योगी बच्चों के संग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में हार न मानें, दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें और अपने सपनों को ऊंची उड़ान दें। प्रयास से ही सफलता मिलती है। कुछ किए बिना कभी जय-जयकार नहीं होती, इसलिए लगातार प्रयास करना आवश्यक है।
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मुख्यमंत्री योगी सोमवार को दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के सभागार में अमर उजाला के बाल मेला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। बाल मेले का आयोजन पिछले साल 14 नवंबर 2025 और 24 जनवरी 2026 को किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कुल 66 बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता बनने पर मेडल पहनाकर सम्मानित किया।

इस मौके पर बच्चों को प्रमाण-पत्र और उपहार भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रकवि पंडित सोहन लाल द्विवेदी की कविता लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती... की पूरी पंक्तियां सुनाकर बच्चों को खूब प्रेरित किया। सफलता का मंत्र बताते हुए मुख्यमंत्री ने जीवन में हार न मानने वाली विभूतियों के संघर्षों का उल्लेख किया।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जीवन के संघर्षों, उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और केंद्रित लक्ष्य को उनकी कामयाबी का आधार बताया। कहा कि डॉ. कलाम वायुसेना के लड़ाकू पायलट बनने में असफल रहे थे।

उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और भारत के मिसाइल मैन बने, बाद में उन्हें भारत रत्न और राष्ट्रपति पद से सम्मानित किया गया। मेजर ध्यानचंद के पास हॉकी स्टिक खरीदने के साधन नहीं थे लेकिन उन्होंने पेड़ की

टहनी से हॉकी बनाकर अभ्यास किया। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि जीवन में अंकों से अधिक हौसलों और स्वयं को तैयार करने का महत्व है।

तकनीक से अधिक मानवीय प्रयास का महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में तकनीक का महत्व बढ़ गया है, लेकिन मनुष्य के अपने प्रयास उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हैं। तकनीक पर निर्भरता उतनी ही होनी चाहिए जितनी वह लोक और राष्ट्र के कल्याण के लिए हितकर हो।

बच्चों को सलाह दी कि अंकों के पीछे उतना ही भागें जो मानसिक संतुष्टि दे सके, क्योंकि अत्यधिक दबाव से खेलना, सोना और खाना-पीना बंद हो जाता है, जो अच्छी स्थिति नहीं है। खूब खेलने, अच्छी पुस्तकें पढ़ने और पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

पंडित सोहन लाल द्विवेदी की कविता की इन पंक्तियों से मुख्यमंत्री ने भरा छात्र-छात्राओं में उत्साह
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जाकर खाली हाथ लौटकर आता है

मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में

मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
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जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम

कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
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