ज्योतिष में सभी ऋतुओं का विशेष महत्व होता है। ऐसे में ग्रह-नक्षत्रों की चाल पर काफी मौसम निर्भर रहते हैं। वर्तमान में गर्मी चरम पर है और इसका कारण है ऊर्जा के स्रोत सूर्य देव। 25 मई से सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में हैं। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी शुरू हो गया है। इन दिनों सूर्य अपने सर्वोच्च ताप में होते है। ऐसे में इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है।
ज्योतिषाचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आते है तो उन पंद्रह दिनों सर्वाधिक गर्मी पड़ती हैं। विज्ञान के अनुसार इन 15 दिनों में सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आती है। इस कारण पृथ्वी पर तापमान बढ़ जाता है।
अधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है और समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती है। वहीं, समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है इसलिए हवाओं का यह रूख अच्छी बारिश का संकेत देता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र से निकलते ही वर्षा ऋतु का आगमन हो जाएगा।