गूगल प्ले स्टोर या एप्पल के एप स्टोर से यूपी कॉप एप को डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर दर्ज कर पंजीकरण करना होगा, फिर अपनी आवश्यकता के अनुसार संबंधित अपराध या जानकारी का विकल्प चुनना होगा।
नामजद छोड़ हर मामला होगा दर्ज
एप की मदद से लूट, चोरी, मारपीट, भूमि विवाद समेत सभी मामले दर्ज कराए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति को नामजद करने पर इस एप से एफआईआर दर्ज नहीं होगी। पुलिस का कहना है कि नामजदगी का विकल्प मिला तो ढेरों लोगों को बेवजह फंसाया जाएगा। जब पुलिस को तहरीर मिलती है तो वह छानबीन करके ही नामजद एफआईआर दर्ज करती है। हालांकि गुमशुदगी, साइबर अपराध सहित कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें नामजदगी भी हो सकती है।
तीन तलाक के मामले में भी दर्ज हो सकता है केस
तीन तलाक के मामले में भी ऑनलाइन एफआईआर कराई जा सकती है। इसके लिए सिस्टम को करीब एक साल पहले ही अपडेट कर दिया गया है। इसका मकसद मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को सहूलियत देना है। वह बिना थाने जाए भी एफआईआर कर सकती हैं।
यूपी पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट
uppolice.gov.in पर लॉग इन करें। होम पेज पर ऊपर ही संपर्क सूत्र में 'हम तक पहुंचें' का विकल्प नजर आएगा। इस लिंक पर जाने पर जो पेज खुलेगा उसपर सीसीटीएनएस पोर्टल पर शिकायत/ ई एफआईआर का विकल्प मिलेगा। इस लिंक पर जाकर पूरा ब्योरा भरना होगा। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मिले ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को दर्ज करने से एफआईआर हो जाएगी।
ये सुविधाएं मिलती हैं
- एफआईआर दर्ज करा सकते हैं
- दर्ज एफआईआर की कॉपी पाई जा सकती है
- पुलिस थाने का लोकेशन और अपना थाना क्षेत्र जान सकते हैं
- सड़क हादसे वाले जगह की जानकारी ली जा सकती है
- बाइक या कार चोरी के बरामद होने की जानकारी मिल सकेगी
- चरित्र, कर्मचारी, किराएदार का सत्यापन करा सकेंगे
- प्रदर्शन, शादी या फिर अन्य किसी की अनुमति ले सकते हैं
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट पा सकेंगे, गिरफ्तार आरोपी की भी होगी जानकारी
एडीजी जोन दावा शेरपा ने बताया कि ऑनलाइन एफआईआर को बढ़ावा दिया जा रहा है। थानों के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी किया गया है। एप की मदद से एफआईआर कराने का चलन बढ़ रहा है। इसकी निगरानी भी की जा रही है।