शहर का नॉर्मल मैदान जो आज शिक्षा विभाग के दफ्तर के लिए जाना जाता है कभी उसकी पहचान कुछ और ही थी। जी हां यहां पर दूर-दूर से लोग आते थे और एक प्रतियोगिता भी आयोजित होती थी। अब आप सोच रहे होंगे मैदान में ऐसी कौन सी प्रतियोगिता होती थी जिसके लिए दूर-दूर से लोग आ जाते थे।
यह प्रतियोगिता होती थी पतंगबाजी की। सट्टा लगता था और लंबी लंबी उड़ान के पास पतंग काटने की प्रतियोगिता होती थी जीतने वाले को इनाम मिलता था तो वहीं इसके लिए महीनों तक लोग तैयारी भी करते थे। मगर वक्त बदलने के साथ ही यह सब कुछ खत्म हो चुका है। अब ना इतना बड़ा मैदान बचा है और ना ही वह शौकीन लोग और पतंगबाजी घरों में कैद हो चुकी है।