बात सन 2000 की है जब अपराध की दुनिया में गोरखपुर के अमित मोहन और रामायण उपाध्याय का नाम सुर्खियों में था। टारगेट सिर्फ डॉक्टर हुआ करते थे। वह दौर ऐसा था कि दोनों बदमाश सिर्फ डॉक्टरों से ही रंगदारी वसूलते थे।
रंगदारी न देने पर डॉक्टर जेपी की हत्या के बाद इतना खौफ फैला कि डॉक्टरों ने खुद अपनी क्लीनिक कई दिन के लिए बंद कर दिए थे। इतना ही नहीं जो डॉक्टर क्लिनिक खोलते थे वह डरे सहमे रहते थे।
यह वह दौर था जब अमित मोहन के डर से डॉक्टर पुलिस पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे थे। उस समस डर बीमारी का नहीं था, जान का था। लेकिन प्राइवेट क्लीनिकों में ठीक इसी तरह का सन्नाटा पसरा था जैसा की आज।