उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-बस्ती मंडल में पिछले दो सालों की अपेक्षा इस वर्ष गोरखपुर व बस्ती मंडल में महिलाओं से होने वाले अपराध तेजी से बढ़े हैं। महिला अपराधों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा किए जा रहे जागरूकता अभियान व रोकथाम के लिए किए गए सारे प्रयास व मुस्तैदी फेल नजर आ रही है।
एडीजी कार्यालय से मिले आंकड़े के अनुसार एक जनवरी से 15 अगस्त 2020 तक जितनी घटनाएं महिला अपराध से संबंधित हुई हैं, उनमें से कुछ वर्ष 2019 के बराबर हैं या कुछ ही कम हैं। आंकड़े सामने आने के बाद एडीजी जोन ने सभी जिलों के कप्तानों व डीआईजी को पत्र लिखकर इस पर लगाम लगाने को कहा है।
महिला अपराध से संबंधित दुष्कर्म, दहेज हत्या, किशोर व किशोरियों के अपहरण, छेड़खानी की घटनाएं इन आठ माह में तेजी से बढ़ी हैं। आठ माह में ही आंकड़े पिछले वर्ष के बराबर पहुंच गए हैं। यही हाल रहा तो साल पूरा होते होते संख्या पिछले दो सालों से ज्यादा हो जाएगी। अकेले गोरखपुर में ही इन आठ माह में 50 दुष्कर्म, 30 दहेज हत्या, 144 अपहरण की घटनाएं हो चुकी है। छेड़खानी तो करीब दो सौ से ज्यादा हैं।
यह हाल तब है, जब पुलिस अपराध कम करने के पुराने फार्मूले, अपराध पंजीकृत न करने की राहत पर चल रही है। इसका ताजा उदाहरण महराजगंज की श्यामदेउरवा पुलिस है। जिसने अभी हाल ही में युवती के दुष्कर्म की बात कहने पर भी केस दर्ज नहीं किया। एडीजी ने डंडा चलाया तो मामला दर्ज हुआ।
अपहरण के मामले में एडीजी ने कई बिंदु पर पुलिस को काम करने के निर्देश दिए हैं। जिसमें केस दर्ज होने पर सतर्कता बरतने, योजनाबद्ध काम करने, सूचना पर तत्काल केस दर्ज कर अधिकारियों को जानकारी देने, अपह्त की फोटो, नाम, मोबाइल नंबर , रिश्तेदार की जानकारी जुटाने, सोशल मीडिया की मदद लेने, 112 व थानों को सूचनाएं प्रसारित करने, अभियान चलाकर सार्वजनिक स्थान पर तलाशी, गैंग का शक होने पर अलग अलग टीम बनाकर घेराबंदी करने, अपहृत के परिजनों के संपर्क करने व उन पुराने मामलों का अध्ययन कर काम करने जिसमें अपहृत को बचाने में सफलता मिली हों आदि कई बिंदु शामिल हैं।