महराजगंज जिले के भारीवैसी गांव में ‘किंग वल्चर’ (गिद्ध की विशेष प्रजाति) के लिए देश का पहला संरक्षण केंद्र बनेगा। शासन से मंजूरी के बाद गांव में पांच एकड़ भूमि आरक्षित कर ली गई है। इसके लिए 83 लाख रुपये भी स्वीकृत किए जा चुके हैं।
देश में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें किंग वल्चर को गिद्धों का राजा भी कहा जाता है। इनकी गर्दन लाल होती है। माना जाता है कि किंग वल्चर के हटने के बाद ही अन्य प्रजातियों के गिद्ध मृत मवेशियों के पास पहुंचते हैं। देश में गिद्धों के चार और संरक्षण केंद्र हैं।
संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल हैं गिद्ध
गिद्ध इको सिस्टम की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। ये मृत पशुओं को को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं। इससे कई प्रकार की महामारी से रक्षा होती है। लेकिन विभिन्न कारणों से हाल के सालों में गिद्धों की संख्या तेजी से कम हो रही है।
डीएफओ ने बताया कि एक आंकड़े के अनुसार 40 साल पहले देश में लगभग चार करोड़ गिद्ध थे। अब इनकी संख्या चार लाख से भी कम हो गई है। इसी वजह से ही यूपी सरकार इनके संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। भारीवैसी में केंद्र स्थापित होने से इनकी संख्या तेजी से बढ़ेगी।
गिद्दों की संख्या बढ़ाने के लिए यहां जटायू प्रजनन केंद्र खोलने की तैयारी पहले से ही चल रही है। ऐसे में किंग वल्चर संरक्षण केंद्र बनाए जाने से गिद्धों की विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाया जा सकेगा।
- अविनाश कुमार, डीएफओ