कानपुर कांड के बाद पुलिस और बदमाशों के गठजोड़ की बात जग जाहिर होने के बाद अब उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने की कवायद तेज कर दी गई है। अफसर इसके लिए गोपनीय तरीके से जांच कराकर ऐसे पुलिस वालों की सूची तैयार करवा रहे हैं जो लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात हैं और उनके बदमाशों से संपर्क होने का संदेह है। खबर है कि बदमाशों और उनसे जुड़े लोगों की कॉल डिटेल से भी यह जानने की कोशिश की जा रही है कि कहीं कोई पुलिस वाले ने तो उनसे संपर्क नहीं किया है।
जानकारी के मुताबिक, ऐसे पुलिस वालों की सूची तैयार हो रही है जो लंबे समय से जिले में हैं। अफसरों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर रहने से उनका बदमाशों से संपर्क बन जाता है। इसके बाद वह पुलिस के भेदिए बन जाते हैं। दूसरे जिलों में तबादले के बाद भी स्टे लेकर या सिफारिश के आधार पर रुके पुलिस वालों की भी जांच कराई जा रही है।
गोपनीय जांच में सामने आया है कि बदमाशों से सीधे साठगांठ रखने वाले पुलिसकर्मियों की जानकारी इतनी आसानी से नहीं हो पाएगी। कुछ का पता चलेगा तो ज्यादातर बच जाएंगे। लिहाजा उनके नेटवर्क को तबादले के 'हथियार' से तोड़ने की भी तैयारी है। इसी के तहत क्राइम ब्रांच से लगायत विभिन्न थाने-चौकी सहित सभी जगहों पर लंबे समय से तैनात पुलिस वालों की भी लिस्ट बनाई जा रही है।
परिक्षेत्र और जोन स्तर पर भी सूची तैयार हो रही है। जिले के अंदर ही नहीं बाहर भी तबादला करने की तैयारी है। बदमाशों को मुखबिर बनाकर अपना काम निकलवाने वालों पर भी नजर रखा जा रहा है।