कल्याण पत्रिका की वार्षिक बुकिंग होती है। पाठकों से 12 मासिक अंकों के पैसे एक साथ जमा करा लिए जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान कल्याण के अप्रैल और मई के अंक प्रकाशित नहीं हो सके थे लेकिन पाठकों को ऑनलाइन कल्याण पढ़ाया गया था।
इसके बावजूद इसके गीता प्रेस प्रबंधन की ओर से पाठकों को जून के अंक भेजने से पूर्व अप्रैल और मई के अंक छपवा कर भेजे जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि पाठकों को कहीं ये न लगे कि पैसा उन्होंने 12 अंकों के दिए जबकि उन तक गीता प्रेस ने 10 अंक ही पहुंचाए। ऐसे में सभी 12 अंक पाठकों तक पहुंचाए जाएंगे।
गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि लॉकडाउन के बाद खुले गीता प्रेस में तेजी से कल्याण के छपाई का कार्य पूरा कराया गया। अब पाठकों तक इसे भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रतिदिन कल्याण की 25 हजार प्रतियां दिल्ली और मुंबई को छोड़ देशभर में भेजने का काम चल रहा है।