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Gorakhpur News: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज से ज्यादा पिटाई के लिए चर्चा में रहते हैं जूनियर डॉक्टर

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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर इलाज से ज्यादा मारपीट की घटनाओं को लेकर चर्चा में है। यहां तैनात जूनियर डॉक्टरों पर तीमारदारों के साथ बदसलूकी और पिटाई के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला एक दिन पहले का है, जिसमें ब्लड सैंपल को लेकर हुए विवाद के बाद तीमारदारों के मारपीट की गई।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार जूनियर डॉक्टरों की ओर से तीमारदारों की पिटाई के मामले सामने आ चुके हैं। पिछले वर्षों में भी इसी तरह के विवादों ने तूल पकड़ा था, जिनमें परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए थे। हर बार जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सख्त कार्रवाई न होने की वजह से जूनियर डॉक्टरों के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं।
अस्पताल परिसर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद इन घटनाओं पर प्रभावी संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि जब पूरी घटना कैमरों में कैद होती है तो फिर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती। इससे अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। तीमारदारों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाए गए इस बड़े सरकारी संस्थान में मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए लेकिन बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं इस भरोसे को कमजोर कर रही हैं।
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इलाज के बारे में पूछा तो पिटाई

गुलरिहा थाना में तैनात एक होमगार्ड का रिश्तेदार भर्ती था। कुछ तीमारदार मरीज को देखने आए। इस पर एक तीमारदार ने इलाज के बारे में पूछने की गुस्ताखी कर ली तो जूनियर डॉक्टरों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। इसके बाद मरीज को भी भगा दिया। मामले में केस दर्ज कराने पर फिर से पीटने की धमकी दी गई। इस पर परिजन बिना केस दर्ज कराए ही घर चले गए।



जल्द इलाज को कहने पर पिटाई

कुशीनगर जिले के रामकोला की एक महिला जहरखुरानी की शिकार हो गई थी। परिजन इलाज के लिए बीआरडी लाए। इस दौरान महिला के एक रिश्तेदार ने जल्द इलाज करने की बात कही तो जूनियर डॉक्टरों ने पीट दिया। पुलिस पहुंची तो किसी तरह मामला शांत हुआ। अंत में परिजन मरीज को लेकर निजी अस्पताल चले गए। इसी तरह कई ऐसे मामले हैं, जहां पर जूनियर डॉक्टरों ने मरीजों और तीमारदारों को बुरी तरह पीटा लेकिन परिजन डर की वजह से किसी ने शिकायत तक नहीं की।


इस संबंध में प्राचार्य डॉ. राम कुमार जायसवाल ने कहा कि इस तरह के मामले दुर्भाग्यपूर्ण हैं। शिकायत पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाती है। किसी को भी इस तरह का कृत्य करने की छूट नहीं है। इसको लेकर कॉलेज प्रशासन सख्त है।
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