बोले मरीज, बिना इलाज लौटे
महराजगंज के शमसुद्दीन ने कहा कि दो साल के बेटे को पीडियाट्रिक वार्ड में दिखाने आया था। पर्चा कट गया था, लेकिन डॉक्टरों ने नहीं देखा। मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ेगा।
गुलहरिया के ईश्वर जायसवाल ने बताया कि मेडिसिन विभाग में दिखाने आया था। ओपीडी का पर्चा कटवा लिया था, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने विरोध शुरू कर दिया। इस पर डॉक्टरों ने देखने से मना कर दिया।
देवरिया के अंबाला सिंह ने कहा कि न्यूरो की दिक्कत काफी दिनों से है। किसी तरह इतने दूर से इलाज के लिए आई। पर्चा भी सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक के लिए कटवा लिया था, लेकिन दिखा नहीं सकी। ठंड में अब फिर से आना पड़ेगा।
भटहट के झीनक ने कहा कि मेडिसिन विभाग की ओपीडी में दिखाना था। इसके लिए ओपीडी का पर्चा कटवाने के लिए काउंटर पर पहुंचा। वहां पहुंचते ही जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर ही बंद करवा दिया।
इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं चार हजार मरीज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में करीब चार हजार के आसपास मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनका पर्चा सुबह आठ बजे से कटना शुरू होता है। मंगलवार की सुबह 11 बजे तक करीब एक हजार मरीज देख लिए गए थे। लेकिन, 11 बजे के बाद जब डॉक्टरों ने विरोध शुरू किया तो बाकी मरीज बिना इलाज के ही लौट गए।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि जूनियर डॉक्टरों को कार्य बहिष्कार करने से 15 दिन पहले सूचना देनी चाहिए थी। लेकिन, जूनियर डॉक्टरों ने कोई पूर्व सूचना नहीं दी। बातचीत की जा रही है। इमरजेंसी की सेवाएं चालू हैं। जल्द ही जूनियर डॉक्टरों को मना लिया जाएगा।
जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आया आईएमए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और जूनियर डॉक्टरों की बैठक मंगलवार को सीतापुर आई हॉस्पिटल में हुई। आईएमए अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर शाही ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की बात सुनी जाए। नीट पीजी काउंसिलिंग को पूरा किया जाना चाहिए। आईएमए जूनियर डॉक्टरों के साथ खड़ा है। सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि अगर जूनियर डॉक्टरों की बात नहीं मानी गई तो आईएमए जिला अस्पताल से लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य कक्ष के सामने आंदोलन करेगा। साथ ही शहर के सभी डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इस दौरान डॉ. डीके सिंह, डॉ. गगन गुप्ता, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के डॉ. शौनक श्रीवास्तव, डॉ. पल्लवी, डॉ. विनय, डॉ. एसी कौशिक, डॉ. भगवानी, डॉ. शशिकांत दीक्षित, आईएमए उपाध्यक्ष प्रो डॉ. अमित मिश्रा, कोषाध्यक्ष डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. शांतनु अग्रवाल, डॉ. बबिता शुक्ला डॉक्टर, डॉ. अल्पना अग्रवाल, डॉ. शशांक, मीडिया प्रभारी डॉ. इमरान अख्तर आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में नर्सिंग होम एसोसिएश के सचिव प्रो डॉ. अमित मिश्रा भी जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आगे आए हैं। कहा कि मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर मरीजों का सबसे अधिक इलाज करते हैं। जूनियर डॉक्टरों के साथ अन्याय हो रहा है। जूनियर रेजीडेंटों की बात सरकार को सुननी चाहिए।
जूनियर डॉक्टरों ने निकाला कैंडल मार्च
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टरों ने शाम को परिसर में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। दिल्ली में जूनियर डॉक्टरों के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार की निंदा की। कैंडल मार्च बाबा राघव दास की प्रतिमा से शुरू हुआ, जो प्राचार्य कार्यालय, मेडिकल कॉलेज के उत्तरी गेट से होकर गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन पर पहुंचा। फिर बाबा राघव दास की प्रतिमा के पास आकर समाप्त हुआ।