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बीआरडी मेडिकल कॉलेज: जूनियर डॉक्टरों ने दूसरे दिन भी किया प्रदर्शन, बिना इलाज लौटे मरीज

Wed, 29 Dec 2021 12:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

जूनियर डॉक्टर पीजी की काउंसिलिंग न होने से नाराज हैं। ओपीडी में करीब एक हजार मरीजों का ही हो इलाज सका।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों ने जमकर विरोध किया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पीजी (स्नातकोत्तर) की काउंसिलिंग न होने से नाराज जूनियर डॉक्टरों (प्रथम वर्ष) ने मंगलवार को जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। नेहरू अस्पताल में ओपीडी पर्चा काउंटर, ओपीडी, पैथोलॉजी, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई जांच और दवा वितरण केंद्र बंद करा दिया, इससे करीब तीन हजार मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा।

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जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि काउंसिलिंग न होने की वजह से प्रथम वर्ष के रेजीडेंट्स पर काफी दबाव बढ़ गया है। यह विरोध काउंसिलिंग के लिए है। बताया कि जनवरी में होने वाली परीक्षा सितंबर में कराई गई। इसी माह के अंत तक परिणाम भी आ गए। लेकिन, अब तक काउंसिलिंग नहीं कराई गई।

जूनियर डॉक्टरों का विरोध मंगलवार सुबह नौ बजे से ही शुरू हो गया। बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर, नेत्र रोग विभाग की ओपीडी, नेत्र रोग विभाग, हड्डी, गायनी, आर्थो, पैथालॉजी आदि विभागों में पहुंचकर सभी को बंद करा दिया। इतना ही नहीं जूनियर डॉक्टरों ने सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक को भी बंद कराते हुए मरीजों को वापस कर दिया। इस बीच कई मरीजों की जांचें होनी थीं, जो दोपहर दो बजे के बाद हो सकीं। हालांकि नेहरू अस्पताल के वार्ड और इनटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती मरीजों का इलाज चल रहा है। जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवा को बंद नहीं कराया है। सभी जूनियर रेजीडेंट इमरजेंसी में ड्यूटी भी कर रहे हैं।
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प्राचार्य के सामने नारेबाजी
दोपहर करीब 12 बजे ओपीडी बंद कराने के बाद जूनियर डॉक्टर पर्चा काउंटर के पास पहुंच गए और कर्मचारियों पर दबाव बनाकर सभी काउंटर बंद करा दिए। इसी बीच प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार वहां आ गए। प्राचार्य ने ऐसा करने से मना किया तो जूनियर डॉक्टर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इससे आपाधापी मच गई। इस दौरान गुलरिहा पुलिस भी मौके पर रही। लेकिन, जूनियर डॉक्टरों की अधिक संख्या देख शांति से खड़े रहे। प्राचार्य को निराश होकर जाना पड़ा है।

बोले मरीज, बिना इलाज लौटे

महराजगंज के शमसुद्दीन ने कहा कि दो साल के बेटे को पीडियाट्रिक वार्ड में दिखाने आया था। पर्चा कट गया था, लेकिन डॉक्टरों ने नहीं देखा। मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ेगा।
   
गुलहरिया के ईश्वर जायसवाल ने बताया कि मेडिसिन विभाग में दिखाने आया था। ओपीडी का पर्चा कटवा लिया था, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने विरोध शुरू कर दिया। इस पर डॉक्टरों ने देखने से मना कर दिया।
 
देवरिया के अंबाला सिंह ने कहा कि न्यूरो की दिक्कत काफी दिनों से है। किसी तरह इतने दूर से इलाज के लिए आई। पर्चा भी सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक के लिए कटवा लिया था, लेकिन दिखा नहीं सकी। ठंड में अब फिर से आना पड़ेगा।
 
भटहट के झीनक ने कहा कि मेडिसिन विभाग की ओपीडी में दिखाना था। इसके लिए ओपीडी का पर्चा कटवाने के लिए काउंटर पर पहुंचा। वहां पहुंचते ही जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर ही बंद करवा दिया।
 

इलाज के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं चार हजार मरीज

बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में करीब चार हजार के आसपास मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनका पर्चा सुबह आठ बजे से कटना शुरू होता है। मंगलवार की सुबह 11 बजे तक करीब एक हजार मरीज देख लिए गए थे। लेकिन, 11 बजे के बाद जब डॉक्टरों ने विरोध शुरू किया तो बाकी मरीज बिना इलाज के ही लौट गए।
 
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि जूनियर डॉक्टरों को कार्य बहिष्कार करने से 15 दिन पहले सूचना देनी चाहिए थी। लेकिन, जूनियर डॉक्टरों ने कोई पूर्व सूचना नहीं दी। बातचीत की जा रही है। इमरजेंसी की सेवाएं चालू हैं। जल्द ही जूनियर डॉक्टरों को मना लिया जाएगा।
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जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आया आईएमए

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और जूनियर डॉक्टरों की बैठक मंगलवार को सीतापुर आई हॉस्पिटल में हुई। आईएमए अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर शाही ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की बात सुनी जाए। नीट पीजी काउंसिलिंग को पूरा किया जाना चाहिए। आईएमए जूनियर डॉक्टरों के साथ खड़ा है। सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि अगर जूनियर डॉक्टरों की बात नहीं मानी गई तो आईएमए जिला अस्पताल से लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य कक्ष के सामने आंदोलन करेगा। साथ ही शहर के सभी डॉक्टर काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इस दौरान डॉ. डीके सिंह, डॉ. गगन गुप्ता, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के डॉ. शौनक श्रीवास्तव, डॉ. पल्लवी, डॉ. विनय, डॉ. एसी कौशिक, डॉ. भगवानी, डॉ. शशिकांत दीक्षित, आईएमए उपाध्यक्ष प्रो डॉ. अमित मिश्रा, कोषाध्यक्ष डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. शांतनु अग्रवाल, डॉ. बबिता शुक्ला डॉक्टर, डॉ. अल्पना अग्रवाल, डॉ. शशांक, मीडिया प्रभारी डॉ. इमरान अख्तर आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में नर्सिंग होम एसोसिएश के सचिव प्रो डॉ. अमित मिश्रा भी जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आगे आए हैं। कहा कि मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर मरीजों का सबसे अधिक इलाज करते हैं। जूनियर डॉक्टरों के साथ अन्याय हो रहा है। जूनियर रेजीडेंटों की बात सरकार को सुननी चाहिए।  
 

जूनियर डॉक्टरों ने निकाला कैंडल मार्च

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टरों ने शाम को परिसर में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। दिल्ली में जूनियर डॉक्टरों के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार की निंदा की। कैंडल मार्च बाबा राघव दास की प्रतिमा से शुरू हुआ, जो प्राचार्य कार्यालय, मेडिकल कॉलेज के उत्तरी गेट से होकर गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन पर पहुंचा। फिर बाबा राघव दास की प्रतिमा के पास आकर समाप्त हुआ।
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