आसमान में धुंध और बादलों के बीच सुर्य
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पर्यावरणविद डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि सामान्य तौर पर गोरखपुर में एक्यूआई 70 से 125 के आसपास रहता है, लेकिन एक्यूआई 500 तक हो गया तो यह खतरनाक है। प्रदूषण के कारण ऊपर जाते हैं और हवा के साथ आगे उड़ जाते हैं। इसके विचरण से वातावरण में सुधार हो जाता है। गर्मी में धूल के कण अधिक होते हैं, जबकि धुआं भी खूब उड़ रहा है। अचानक हवा थम गई तो अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।
खजांची चौराहा स्थित रंजीत कुमार ने बताया कि शनिवार सुबह ही आंखों में जलन होने लगी। मैंने तीन लोगों से बात की तो सही जानकारी नहीं मिली। कुछ लोग कयास लगा रहे थे कि कहीं गैस लीक हो रही है? लोगों की चिंता थी कि कहीं ये परेशानी बढ़ गई तो क्या होगा।
राजेंद्र नगर के अरविंद तिवारी ने बताया कि सुबह आंखों में जलन होने से लोग परेशान हो गए। पहले मुझे लगा कि मेरी ही आंख में कोई दिक्कत है। उसके बाद परिवार के लोगों ने भी यहीं परेशानी बताई। फिर आसपास के लोगों से बात की, लेकिन कोई नहीं बता पाया कि ये परेशानी क्यों है।
इस कारण जहरीली हुई हवा
पदेवरिया बाईपास फोरलेन निर्माण एवं रुस्तमपुर और फलमंडी में सिक्स लेन निर्माण के कारण लोगों की परेशानी अधिक रही, क्योंकि उन क्षेत्रों में पहले से ही लोग उड़ती धूल से परेशान थे। नाॅर्मल रोड पर भी सड़क की धूल से परेशानी बढ़ रही थी। इसी प्रकार मोहद्दीपुर चौराहों पर वाहनों का जाम लगने से धुआं उठता रहा, जबकि गोरखपुर बस अड्डे पर भी जाम से दिक्कत अधिक रही।