मुख्य अभियंता की गठित टीम द्वारा निर्णय नहीं मिलने की वजह से ही उपभोक्ता भी शायद सीधे चेयरमैन का रुख कर ले रहे हैं। कुशीनगर के एक मामले में उपभोक्ता ने सीधे चेयरमैन को फोन कर शिकायत की थी। 15 घंटे के भीतर उपभोक्ता की समस्या भी दूर होने के साथ अवर अभियंता पर कार्रवाई कर दी। ऐसे ही चौरीचौरा के एक मामले में उपभोक्ता की शिकायत पर चेयरमैन के निर्देश पर उसी दिन शाम को अवर अभियंता पर मुकदमा दर्ज कर निलंबित कर दिया गया।
मुख्य अभियंता एके सिंह ने कहा कि सभी अभियंता व कर्मचारी निगम के प्रति जिम्मेदार होते हैं। वित्तीय गड़बड़ी जैसे गंभीर मामलों में अगर जांच करने वाली टीम लापरवाही करती है और बिना तर्क के अतिरिक्त समय लगाती है तो यह खुद में गंभीर मामला है। विलंब होने पर एकपक्षीय कार्रवाई के लिए उक्त जिम्मेदार तैयार रहें। जांच में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर तय समय से अधिक विलंब होने पर उन जांच अधिकारियों को भी इसमें दोषी माना जा सकता है।
केस-1
बक्शीपुर खंड में पिछले दिनों वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए मुख्य अभियंता ने दो सदस्यीय टीम गठित की थी। महीनों बीत गए, जांच में तैनात एक अधिकारी का दूसरे जिले में तबादला हो गया। 4 अगस्त को मुख्य अभियंता ने नई टीम गठित कर फिर से जांच का रिमाइंडर (अनुस्मारक पत्र) भी भेजा। तीन कार्यदिवस के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया। इसके बाद भी जांच अभी तक नहीं शुरू हो सकी, पूरी कब करेंगे? अब भी सवाल है।
केस 2
शहरी खंड के अलग-अलग क्षेत्र में बिजली सुधार संबंधी काम करवाए गए थे। निगम के मुताबिक, इस काम को पूरा करने के बाद उक्त फर्म की तरफ से बार-बार बिल जमा कर भुगतान लिया गया। इस संदर्भ में मुख्य अभियंता ने टीम गठित की थी। लेकिन, जांच अधिकारियों को निगम के धन के नुकसान की चिंता नहीं। 8 जुलाई को मुख्य अभियंता ने पत्र लिखकर एक सप्ताह में पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। लेकिन, मामला जस का तस लटका हुआ है।