गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए विश्वविद्यालय को विभिन्न देशों से 90 विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 32 विश्वविद्यालय के पोर्टल और 58 आवेदन भारत सरकार के ''''स्टडी इन इंडिया'''' पोर्टल के माध्यम से मिले हैं।
इन आवेदनों में सर्वाधिक 51 छात्र बांग्लादेश से हैं, जबकि नेपाल से 31, संयुक्त अरब अमीरात से पांच, कोलंबिया, दक्षिण अफ्रीका और सूडान से एक-एक आवेदन प्राप्त हुए हैं। विदेशी विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग, कंप्यूटर एप्लीकेशन, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, माइक्रोबायोलॉजी और शोध कार्यक्रमों सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में रुचि दिखाई है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2027-28 से भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के माध्यम से प्रवेश लेने वाले अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग और बेहतर शोध अवसर मिलेंगे। वैश्विक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में विश्वविद्यालय ने उत्तर प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय ड्यूल डिग्री एमबीए कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके तहत विद्यार्थी प्रथम वर्ष की पढ़ाई गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं द्वितीय वर्ष की पढ़ाई मलेशिया की मैनेजमेंट एंड साइंस यूनिवर्सिटी में करेंगे।
बोलीं कुलपति
गुणवत्तापूर्ण शोध, समयबद्ध परीक्षा, छात्र केंद्रित शिक्षण व्यवस्था और आधुनिक शैक्षणिक वातावरण विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान के प्रमुख आधार हैं। विदेशी विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू