गोरखपुर। कैंट रेलवे स्टेशन के पश्चिम लाइन के किनारे पैदल और बाइक से आने-जाने के लिए बने लोहे के पुल को बंद करने की सूचना पर शनिवार को स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। विरोध और हंगामा देखकर रेल अधिकारियों ने पुल बंद नहीं कराया और रेलकर्मी और आरपीएफ जवान लौट आए। लोगों ने सोमवार को महाप्रबंधक से मिलने का अनुरोध करते हुए समय मांगा, जिस पर अधिकारियों ने दो दिन की मोहलत दी है। इस पुल से आठ-दस कॉलाेनियों के लोगों के अलावा रेल यात्री भी आते-जाते हैं।
शनिवार शाम करीब पांच बजे रेलकर्मी रेलवे पुल के पास पहुंचे और बंद करने की कवायद शुरू की। सुरक्षा के लिए आरपीएफ के जवान भी साथ में थे। इसकी सूचना मिलते ही वार्ड नंबर 18 की पार्षद माया देवी के प्रतिनिधि रामनाथ निषाद और झरना टोला के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने पुल बंद किए जाने का विरोध शुरू कर दिया।
इसी बीच पुल पर जाम लग गया और बहुत सारे राहगीर फंस गए। कुछ राहगीर भी पुल का रास्ता बंद करने का विरोध करने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब पांच दशक से यह पुल है। इसके बंद होने से बड़ी आबादी को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।पार्षद प्रतिनिधि रामनाथ निषाद ने बताया कि दो वर्ष पहले ही लोहे के पुल की चौड़ाई तीन से बढ़ाकर चार फीट की गई थी ताकि दो पहिया वाहन आराम से निकल सके।
इस मामले में स्थानीय लोग सोमवार को रेल महाप्रबंधक से मुलाकात करेंगे। लल्लन शर्मा और नरेंद्र सिंह ने कहा कि पैदल पुल के चालू होने से रेलवे एवं आरपीएफ के लोगों के साथ उनके परिवार के लोगों की सुविधा मिलती है। हम लोग सोमवार को सुबह 10 बजे इस मामले को लेकर महाप्रबंधक से मिलेंगे।
विरोध करने वालों में राकेश शर्मा, अभिषेक सिंह, वीरेंद्र सिंह, आरपी सिंह, शंभू सिंह सहित अन्य नागरिक शामिल रहे।
इन कॉलोनियों का है रास्ता
उंचवा, दरगहिया, झरना टोला, गायात्रीनगर, लालगंज, कोड़इया, मोहनापुर आदि।